जनवरी 2026 में अमावस्या कब है, देखें 17 या 18 जनवरी- साल की पहली अमावस्या कब है, जनवरी में कौन सी अमावस्या आती है
- Authored by: मेधा चावला
- Updated Jan 15, 2026, 03:31 PM IST
17 या 18 जनवरी 2026 में अमावस्या कब है (जनवरी में कौन सी अमावस्या है): अमावस्या तिथि एक विशेष स्थान रखती है। यहां आप जान सकते हैं कि जनवरी 2026 में अमावस्या कब पड़ेगी, जनवरी में कौन सी अमावस्या आती है और अमावस्या किस तारीख को है जनवरी 2026 को। जानें जनवरी की अमावस्या तिथि का डेट एंड टाइम।
जनवरी 2026 में अमावस्या कब है
17 या 18- जनवरी 2026 में अमावस्या कब है (जनवरी में कौन सी अमावस्या है): हिंदू पंचांग के अनुसार, जनवरी 2026 में आने वाली अमावस्या (नया चंद्र मास/No Moon तिथि) 17 या 18 जनवरी की बात कुछ लोगों में भ्रम है, लेकिन पंचांग के मुताबिक यह 18 जनवरी 2026 को ही आती है। यहां देखें कि जनवरी में अमावस्या कब से लगेगी, इस दिन कौन सा वार है। नोट करें जनवरी की अमावस्या तिथि का डेट एंड टाइम।
जनवरी में कौन सी अमावस्या आती है
हिंदू पंचांग के अनुसार, जनवरी में माघ मास की अमावस्या आती है। इसे माघी अमावस्या भी कहा जाता है। इस अमावस्या तिथि पर मौन रखने का विशेष महत्व है। इस वजह से इसे मौनी अमावस्या भी कहा जाता है और जनवरी की माघी अमावस्या का यही प्रसिद्ध नाम भी है।
जनवरी 2026 में अमावस्या कब है
जनवरी 2026 में अमावस्या की सही डेट 18 जनवरी है। इस दिन रविवार है। जनवरी 2026 की माघी अमावस्या की तिथि 18 जनवरी को 12:03 पर आरंभ होगी। इस तिथि का समापन 19 जनवरी को 01:21 AM पर होगा। यानी अमावस्या की तिथि का आरंभ 18 जनवरी को ही हो रहा है।
साल 2026 की पहली अमावस्या
अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जनवरी साल का पहला महीना होता है और इस नाते जनवरी मास में पंचांग के अनुसार आने वाले व्रत त्योहार भी साल के पहले त्योहार और तिथियों वाले माने जाते हैं। इस आधार पर 18 जनवरी 2026 को पड़ने वाली माघी अमावस्या इस साल की पहली अमावस्या है। इसे मौनी अमावस्या भी कहते हैं।
अमावस्या का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व
अमावस्या वह तिथि है जब चंद्रमा पूरी तरह दिखाई नहीं देता। इस तिथि को हिंदू धर्म में नया चंद्र मास/नया चांद दिन कहा जाता है। इस दिन पितृ तर्पण, दान, ध्यान एवं श्राद्ध कर्म किए जाते हैं। धार्मिक ग्रंथों और पंचांग के अनुसार, अमावस्या पर किए गए दान, पितृ तर्पण और स्नान से व्यक्ति को जीवन में शांति, पूर्वजों को तर्पण का पुण्य और आत्मिक शुद्धि प्राप्त होती है।