दरअसल छिपकली हमेशा अपने बचाव के लिए सतर्क रहती है। अगर उसे खतरे का जरा सा भी आभास होता है तो वह तुरंत भागकर किसी कोने में छिप जाती है या फिर उस खतरे से खुद को दूर कर लेती है।
छिपकली सबसे ज्यादा मोर के पंख (मोरपंख) से डरती है। इसके पीछे एक दिलचस्प कारण है। मोर छिपकली का शिकारी माना जाता है, यानी वह उसे खा सकता है। मोर के पंख पर जो गोल-गोल डिजाइन बने होते हैं, वे आंखों जैसे दिखाई देते हैं।
छिपकली को लगता है कि आसपास मोर मौजूद है। इसी डर की वजह से वह मोरपंख को देखते ही वहां से दूर भाग जाती है इसलिए कई लोग अपने घर से छिपकली को भगाने के लिए मोरपंख का इस्तेमाल करते हैं।
छिपकली को तीखी गंध बिल्कुल पसंद नहीं होती। प्याज, लहसुन, कपूर या फिनाइल जैसी चीजों की तेज गंध को सूंघते ही वह भाग खड़ी होती है। यही कारण है कि अगर घर में इन चीजों की गंध ज्यादा हो, तो छिपकली वहां ज्यादा देर तक नहीं रुकती और किसी दूसरी जगह चली जाती है।
कुछ लोग घर में छिपकली से बचने के लिए अंडे के छिलके भी रखते हैं। माना जाता है कि छिपकली को अंडे के छिलकों की गंध अच्छी नहीं लगती, इसलिए वह उस जगह से दूर रहने की कोशिश करती है, जहां पर अंडे के छिलके रहते हैं।
छिपकली को बहुत ठंडी चीजें भी पसंद नहीं होतीं। कई बार लोग पानी का स्प्रे या डिटॉल और कपूर का घोल छिड़कते हैं, जिससे छिपकली वहां से भाग जाती है।
छिपकली अपने बचाव के लिए काफी अनोखा तरीका अपनाती है। जब भी उसे बहुत ज्यादा खतरा महसूस होता है, या फिर वह डरी होती है तो वह अपनी पूंछ को अपने शरीर से अलग कर देती है। इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक भाषा में ऑटोटॉमी (Autotomy) कहा जाता है।