समुद्र के बीचों-बीच है दुनिया का सबसे खतरनाक हिंदू मंदिर, क्या सच में 600 साल से सांप करते हैं रखवाली

Tanah Lot Temple Facts: आपको जानकर आश्चर्य होगा कि दुनिया का सबसे खतरनाक हिंदू मंदिर भारत में नहीं बल्कि एक मुस्लिम देश में स्थित है। आपको जानकर हैरानी होगी कि इस मंदिर की सुरक्षा की जिम्मेदारी विषैले सांपों की है। पता नहीं इस बात में कहां तक सच्चाई है, लेकिन मान्यता तो यही है।

Authored by: आदित्य साहूUpdated Jul 20 2025, 17:24 IST
इंडोनेशिया में समुद्र के बीचों-बीच स्थितImage Credit : IStock01 / 07

इंडोनेशिया में समुद्र के बीचों-बीच स्थित

आपको बता दें कि यह मंदिर इंडोनेशिया में समुद्र के बीचों-बीच स्थित है। यह एक ऊंची चट्टान पर बना हुआ बेहद ही अनोखा मंदिर है। (फोटो साभार- iStock)

600 सालों से इस्लामिक देश में मौजूदImage Credit : IStock02 / 07

600 सालों से इस्लामिक देश में मौजूद

सबसे अनोखी बात यह है कि दुनिया का सबसे खतरनाक हिंदू मंदिर पिछले 600 सालों से एक इस्लामिक देश में मौजूद है। (फोटो साभार- iStock)​

बेहद ही ऊंची चट्टान पर बनाImage Credit : IStock03 / 07

बेहद ही ऊंची चट्टान पर बना

इंडोनेशिया में मौजूद यह मंदिर समुद्र के बीचों-बीच एक बेहद ही ऊंची चट्टान पर बना हुआ है। पिछले 600 सालों से यह मंदिर पूरी तरह सुरक्षित है। (फोटो साभार- iStock)

समुद्र में उत्पन्न ज्वार के कारण बनी चट्टानImage Credit : IStock04 / 07

समुद्र में उत्पन्न ज्वार के कारण बनी चट्टान

जिस चट्टान पर यह मंदिर बना हुआ है, उसे लेकर मान्यता है कि हजारों साल पहले समुद्र में उत्पन्न हुए ज्वार के कारण इस चट्टान का निर्माण हुआ था। (फोटो साभार- iStock)

तनाह लोत नाम का मंदिरImage Credit : IStock05 / 07

तनाह लोत नाम का मंदिर

हम जिस मंदिर की बात कर रहे हैं, उसका नाम तनाह लोत है। स्थानीय भाषा में 'तनाह लोत' का मतलब 'समुद्री भूमि' या 'समुद्र में जमीन' है। (फोटो साभार- iStock)

सात मंदिरों की श्रृंखलाImage Credit : IStock06 / 07

सात मंदिरों की श्रृंखला

बता दें कि इंडोनेशिया के बाली में समुद्र तट पर सात मंदिरों की एक श्रृंखला है, जिसमें से यह मंदिर एक है। हर मंदिर से अगला मंदिर बेहद ही साफ दिखाई देता है। (फोटो साभार- iStock)

15वीं सदी में हुआ था निर्माणImage Credit : IStock07 / 07

15वीं सदी में हुआ था निर्माण

माना जाता है कि इस मंदिर का निर्माण 15वीं सदी में हुआ। इसे निरर्थ नाम के पुजारी ने बनवाया। पुजारी निरर्थ समुद्र तट के किनारे चलकर इस जगह पर पहुंचे थे, यहां की सुंदरता उन्हें इतनी भाई कि उन्होंने मंदिर निर्माण का निर्णय लिया। (फोटो साभार- iStock)

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