हम बचपन से पढ़ते, सुनते और देखते आए हैं कि सड़क पर यातायात व्यवस्था को कंट्रोल करने के लिए ट्रैफिक लाइट का होना बहुत जरूरी है। बिना इसके सड़क पर जाम लग सकता है लेकिन सोचिए दुनिया का एक ऐसा भी देश है, जिसे अपने देश के ट्रांसपोर्ट को कंट्रोल करने के लिए आज भी ट्रैफिक लाइट की जरूरत नहीं पड़ती। अब आप सोच रहे होंगे कि भला ये कौन सा देश है और बिना ट्रैफिक लाइट के वहां का ट्रैफिक कैसे कंट्रोल होता है? तो चलिए आज हम आपको आपके इन सारे सवालों के जवाब दे देते हैं।
हम जिस देश की बात कर रहे हैं, उस अनोखे देश का नाम भूटान है, जो भारत का पड़ोसी देश है। यह देश अपनी खूबसूरत वादियों, शांत माहौल और अनुशासित लोगों के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है। यहां की सड़कें भी किसी अचंभे से कम नहीं हैं। यहां बिना ट्रैफिक लाइट और किसी जाम के ही गाड़ियां बहुत ही आराम से चलती हुई नजर आती हैं।
आज लगभग हर देश में ट्रैफिक को संभालने के लिए लाल, पीली और हरी बत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है लेकिन भूटान में आपको एक भी ट्रैफिक सिग्नल नहीं मिलेगा। पहली बार यहां आने वाले पर्यटक इस बात पर यकीन ही नहीं कर पाते। उन्हें लगता है कि बिना ट्रैफिक लाइट के सड़क पर अफरा-तफरी होगी, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं है। यहां वाहन आराम से अपनी लेन में चलते हैं और सड़क पर अनुशासन साफ दिखाई देता है।
बहुत कम लोग जानते हैं कि भूटान की राजधानी थिम्फू में साल 1995 में ट्रैफिक लाइट लगाई गई थी, लेकिन स्थानीय लोगों को यह पसंद नहीं आई। लोगों का मानना था कि मशीनों के भरोसे ट्रैफिक चलाने से इंसानों के बीच का जुड़ाव कम हो जाएगा। साथ ही उनका कहना था कि ट्रैफिक लाइट शहर की शांति और पारंपरिक माहौल को भी प्रभावित करती है। कुछ ही समय बाद उस ट्रैफिक लाइट को हटा दिया गया और फिर दोबारा कभी इसे लगाने की जरूरत महसूस नहीं हुई।
अब सवाल यह है कि जब ट्रैफिक लाइट ही नहीं है, तो सड़क पर व्यवस्था कैसे बनी रहती है? इसका जवाब है ट्रैफिक पुलिस। भूटान में चौराहों पर ट्रैफिक पुलिस अपने हाथों के इशारों से वाहनों को नियंत्रित करती है। उनकी ट्रेनिंग इतनी अच्छी होती है कि वे आसानी से गाड़ियों की आवाजाही को संभाल लेते हैं। उनके लिए खूबसूरत ट्रेडिशनल बूथ भी बनाए गए हैं। कई विदेशी पर्यटक इन पुलिसकर्मियों के अनोखे अंदाज को देखकर वीडियो बनाते हैं और सोशल मीडिया पर शेयर करते हैं।
भूटान का रोड कल्चर दुनिया के कई देशों से अलग है। यहां लोग जल्दबाजी में गाड़ी नहीं चलाते। हर ड्राइवर दूसरे वाहन, पैदल यात्री और साइकिल चलाने वालों का सम्मान करता है। सबसे खास बात यह है कि यहां बिना वजह हॉर्न बजाना पसंद नहीं किया जाता इसलिए सड़कों पर शोर-शराबा भी बहुत कम सुनाई देता है। यही वजह है कि यहां सफर करना बेहद शांत और आरामदायक महसूस होता है।
भूटान की आबादी कम है और सड़कों पर वाहनों की संख्या भी दूसरे देशों की तुलना में काफी कम है लेकिन सिर्फ यही वजह नहीं है। असल कारण यह है कि यहां के लोग ट्रैफिक नियमों का पूरी ईमानदारी से पालन करते हैं। वे स्पीड लिमिट का ध्यान रखते हैं और पूरे धैर्य के साथ ड्राइविंग करते हैं। पहाड़ी इलाकों में ज्यादातर वाहन 20 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से चलते हैं। राजधानी थिम्फू में भी तेज रफ्तार बहुत कम देखने को मिलती है।