LPG मुख्य रूप से प्रोपेन और ब्यूटेन गैस का मिश्रण होता है। इसे उच्च दबाव में सिलेंडर के अंदर भरा जाता है, जिससे यह गैस तरल (लिक्विड) रूप में बदल जाती है। यही कारण है कि जब सिलेंडर को हिलाया जाता है, तो अंदर कुछ तरल जैसा महसूस होता है। वास्तव में यह पानी नहीं, बल्कि गैस का लिक्विड फॉर्म होता है।
LPG को तरल रूप में रखना बेहद जरूरी होता है, क्योंकि इससे कम जगह में ज्यादा गैस स्टोर की जा सकती है। अगर इसे गैस के रूप में ही रखा जाए, तो सिलेंडर का आकार बहुत बड़ा करना पड़ेगा। तरल रूप में रखने से यह आसानी से ट्रांसपोर्ट और स्टोर किया जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं तक गैस पहुंचाना सरल हो जाता है।
जब आप गैस स्टोव ऑन करते हैं, तो सिलेंडर के अंदर मौजूद तरल LPG धीरे-धीरे गैस में बदल जाती है। यह गैस पाइप के जरिए स्टोव तक पहुंचती है और जलने लगती है। यानी सिलेंडर के अंदर लगातार तरल से गैस में बदलाव होता रहता है, जिससे कुकिंग के लिए जरूरी ऊर्जा मिलती है।
कई लोगों को लगता है कि सिलेंडर का वजन बढ़ाने के लिए उसमें पानी मिलाया जाता है, लेकिन यह पूरी तरह गलत धारणा है। LPG सिलेंडर में किसी भी प्रकार का पानी नहीं डाला जाता। इसका वजन गैस और सिलेंडर के धातु के कारण होता है। कंपनियां सख्त सुरक्षा मानकों का पालन करती हैं, इसलिए इसमें मिलावट की संभावना नहीं होती।
LPG का तरल रूप में रहना सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। सिलेंडर को इस तरह डिजाइन किया जाता है कि वह उच्च दबाव को सह सके और गैस का रिसाव न हो। साथ ही, इसमें रेगुलेटर और वाल्व जैसे सुरक्षा उपकरण लगाए जाते हैं, जो गैस के प्रवाह को नियंत्रित करते हैं।