जहां राधा रानी से छुप-छुपकर मिलते थे कृष्ण, आज भी मौजूद है वो बगीचा, गोवर्धन से 2 km दूर

Govardhan Parikrama: आज हम आपको जिस जगह के बारे में डिटेल में बताने जा रहे हैं वो वही जगह है जहां से राधा-कृष्ण का प्रेम शुरू हुआ था। ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व के लिए फेमस ये जगह भक्तों के लिए आकर्षण का केंद्र है।

Authored by: प्रभात शर्माUpdated Feb 25 2025, 09:59 IST
प्रेम भक्ति और आस्था का संगमImage Credit : Istock01 / 06

प्रेम भक्ति और आस्था का संगम

भक्तों के लिए ये जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। ये वही जगह है जहां भगवान कृष्ण नियमित रूप से आया करते थे। इस स्थान का उल्लेख प्राचीन पुराणों में है जो आज के टाइम में प्रेम, भक्ति और आस्था का संगम है।

कुसुम सरोवरImage Credit : Istock02 / 06

कुसुम सरोवर

मथुरा के गोवर्धन से तकरीबन 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक कुसुम सरोवर भगवान कृष्ण से जुड़ा हुआ है। इस बगीचे को कृष्ण-राधा के बगीचे के रूप में जाना जाता है।

सरोवर से जुड़ी मान्यताImage Credit : Istock03 / 06

सरोवर से जुड़ी मान्यता

मान्यता है कि राधा रानी भगवान कृष्ण के लिए फूल चुनने सखियों के साथ इसी सरोवर में जाती थीं। भगवान कृष्ण राधा जी से यहीं छुप-छुपकर मिला करते थे।

मन मोह लेगी सुंदरताImage Credit : Istock04 / 06

मन मोह लेगी सुंदरता

प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने के लिए आपको कुसुम सरोवर की यात्रा करनी ही चाहिए। चारों ओर से सैकड़ों सीढ़ियों और घने कदम के पेड़ों से घिरा हुए इस सरोवर की सुंदरता आपका मन मोह लेगी।

राजा वीर सिंह देव ने करवाया था निर्माणImage Credit : Istock05 / 06

राजा वीर सिंह देव ने करवाया था निर्माण

कृष्ण-राधा से जुड़े होने की वजह से ये बगीचा भक्त, प्रेमियों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां हर कोना भक्ति और आस्था से सराबोर नजर आता है।

राजा वीर सिंह देव ने करवाया था निर्माणImage Credit : Istock06 / 06

राजा वीर सिंह देव ने करवाया था निर्माण

मध्य प्रदेश के राजा वीर सिंह देव ने 17वीं शताब्दी में इसका निर्माण करवाया था। 450 फीट लंबे और 60 फीट गहरे इस ऐतिहासिक सरोवर को राजा सूरजमल ने भव्य स्वरूप दिया था।

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