भक्तों के लिए ये जगह किसी स्वर्ग से कम नहीं है। ये वही जगह है जहां भगवान कृष्ण नियमित रूप से आया करते थे। इस स्थान का उल्लेख प्राचीन पुराणों में है जो आज के टाइम में प्रेम, भक्ति और आस्था का संगम है।
मथुरा के गोवर्धन से तकरीबन 2 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ऐतिहासिक कुसुम सरोवर भगवान कृष्ण से जुड़ा हुआ है। इस बगीचे को कृष्ण-राधा के बगीचे के रूप में जाना जाता है।
मान्यता है कि राधा रानी भगवान कृष्ण के लिए फूल चुनने सखियों के साथ इसी सरोवर में जाती थीं। भगवान कृष्ण राधा जी से यहीं छुप-छुपकर मिला करते थे।
प्राकृतिक सुंदरता को करीब से देखने के लिए आपको कुसुम सरोवर की यात्रा करनी ही चाहिए। चारों ओर से सैकड़ों सीढ़ियों और घने कदम के पेड़ों से घिरा हुए इस सरोवर की सुंदरता आपका मन मोह लेगी।
कृष्ण-राधा से जुड़े होने की वजह से ये बगीचा भक्त, प्रेमियों और पर्यटकों के बीच आकर्षण का केंद्र बना हुआ है। यहां हर कोना भक्ति और आस्था से सराबोर नजर आता है।
मध्य प्रदेश के राजा वीर सिंह देव ने 17वीं शताब्दी में इसका निर्माण करवाया था। 450 फीट लंबे और 60 फीट गहरे इस ऐतिहासिक सरोवर को राजा सूरजमल ने भव्य स्वरूप दिया था।