​दुनिया का पहला टच-स्क्रीन फोन कौन था, आपको भी नहीं पता होगा, सिर्फ 1 घंटे चलती थी बैटरी​

​आज की दुनिया में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुके हैं। स्मार्टफोन आज साये के साथ हमारे साथ 24 घंटे रह रहे हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया का पहला टचस्क्रीन फोन कौन था? दुनिया का पहला टच स्क्रीन स्मार्टफोन 1992 में लॉन्च हुआ था जिसकी बैटरी महज 1 घंटे ही चलती थी। आइए जानते हैं इस फोन के बारे में विस्तार से....​

Authored by: प्रदीप पाण्डेयUpdated Dec 17 2025, 08:15 IST
​IBM Simon Personal Communicator​Image Credit : Mobilephonemuseum01 / 08

​IBM Simon Personal Communicator​

IBM Simon Personal Communicator को दुनिया का पहला स्मार्टफोन माना जाता है। वैसे तो इसे पहली 1992 में ही एक ट्रेड शो में दिखाया गया था लेकिन इसने 1994 में मोबाइल टेक्नोलॉजी की नींव रखी। यह फोन न केवल कॉल करने के लिए था, बल्कि इसमें ईमेल, फैक्स और कैलेंडर जैसी सुविधाएं थीं, जो आज के फोन्स के टक्कर की बात है। IBM ने BellSouth Cellular के साथ मिलकर इसे तैयार किया था हालांकि, iPhone जैसी लोकप्रियता नहीं मिली, लेकिन इसने भविष्य की दिशा तय की।

​IBM Simon की कहानी ​Image Credit : Mobilephonemuseum02 / 08

​IBM Simon की कहानी ​

​IBM Simon की कहानी 1990 के दशक की शुरुआत से शुरू होती है। IBM के इंजीनियर्स ने एक ऐसा डिवाइस बनाना चाहा जो फोन और कंप्यूटर का मिश्रण हो। 1992 में लास वेगास के Comdex में प्रोटोटाइप दिखाया गया, जिसे 'Angler' कोडनेम दिया गया था। 1993 में आधिकारिक रूप से अनाउंस किया गया, और अगस्त 1994 में अमेरिका में लॉन्च हुआ। ​

​50,000 यूनिट्स की बिक्री​Image Credit : Mobilephonemuseum03 / 08

​50,000 यूनिट्स की बिक्री​

​BellSouth ने इसे डिस्ट्रीब्यूट किया, और शुरुआती कीमत 899 डॉलर (दो साल के कॉन्ट्रैक्ट के साथ) या 1099 डॉलर बिना कॉन्ट्रैक्ट के थी। उस समय यह काफी महंगा था, लेकिन टेक्नोलॉजी के लिहाज से क्रांतिकारी। सिर्फ छह महीने में यह बाजार से हट गया, क्योंकि बैटरी लाइफ और वजन जैसी समस्याएं थीं। कुल मिलाकर 50,000 यूनिट्स ही बिकीं। ​

​एलसीडी स्क्रीन​Image Credit : Mobilephonemuseum04 / 08

​एलसीडी स्क्रीन​

​यह फोन PDA (Personal Digital Assistant) और सेल्युलर फोन का कॉम्बिनेशन था, जो IBM की दूरदर्शिता को दिखाता है। इसके फीचर्स की बात करें IBM Simon में 4.5 इंच की मोनोक्रोम LCD टचस्क्रीन थी, जो रेसिस्टिव टेक्नोलॉजी पर आधारित थी। यूजर्स स्टाइलस से इसे ऑपरेट करते थे, जिसमें कैलकुलेटर, नोटपैड, एड्रेस बुक और स्केच पैड जैसे ऐप्स थे। ​

​1 एमबी रैम के साथ 1 एमबी स्टोरेज​Image Credit : Mobilephonemuseum05 / 08

​1 एमबी रैम के साथ 1 एमबी स्टोरेज​

​यह ईमेल भेज सकता था, फैक्स कर सकता था और यहां तक कि पेजर के रूप में काम करता था। 1 MB मेमोरी और 1 MB स्टोरेज के साथ, यह उस दौर के लिए एडवांस्ड था, हालांकि बैटरी सिर्फ एक घंटे की टॉक टाइम देती थी, और वजन करीब 510 ग्राम था। ​

​मेमोरी कार्ड की भी सुविधा​Image Credit : Mobilephonemuseum06 / 08

​मेमोरी कार्ड की भी सुविधा​

​इसमें PCMCIA स्लॉट भी था, जो एक्सटर्नल मेमोरी ऐड करने की सुविधा देता था। ये फीचर्स आज के स्मार्टफोन्स की बुनियाद बने, जैसे मल्टीटास्किंग और टच इंटरफेस। IBM Simon की कमर्शियल सफलता सीमित रही, लेकिन इसने मोबाइल इंडस्ट्री पर गहरा प्रभाव डाला। यह पहला डिवाइस था जो 'स्मार्टफोन' शब्द को सही मायने में परिभाषित करता था। ​

​आईफोन के आने से पहले रचा इतिहास​Image Credit : Mobilephonemuseum07 / 08

​आईफोन के आने से पहले रचा इतिहास​

​2007 में iPhone आने से पहले, Simon ने दिखाया कि फोन सिर्फ बात करने का माध्यम नहीं, बल्कि पर्सनल कंप्यूटर हो सकता है। कई एक्सपर्ट्स इसे 'फर्स्ट जनरेशन स्मार्टफोन' कहते हैं। आज, जब हम Apple या Samsung के फोन्स इस्तेमाल करते हैं, तो Simon की विरासत को याद करना जरूरी है। ​

​मील का पत्थर​Image Credit : Mobilephonemuseum08 / 08

​मील का पत्थर​

​इसने टेक्नोलॉजी कंपनियों को प्रेरित किया कि मोबाइल डिवाइसेज में कंप्यूटिंग पावर जोड़ी जा सकती है, हालांकि महंगाई और टेक्निकल लिमिटेशन्स ने इसे मास मार्केट से दूर रखा। IBM Simon भले ही भुला दिया गया हो, लेकिन यह मोबाइल इतिहास का मील का पत्थर है। सीधे शब्दों में कहें तो अगर Simon नहीं होता, तो शायद आज के स्मार्टफोन्स का रूप अलग होता।​

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