अभी हाल ही में वेनेजुएला में भी ऐसा ही देखने को मिला। कई रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका ने वेनेजुएला के राष्ट्रपति को गिरफ्तार करने से पहले वहां साइबर अटैक किया था और वहां के बिजली विभाग से लेकर रक्षा विभाग तक के सिस्टम को हैक कर लिया था जिससे फायदा यह हुआ कि वेनेजुएला को भनक तक नहीं लगी और राष्ट्रपति को अमेरिका उठा ले गया। आइए समझते हैं कि हैकर्स कितने प्रकार के होते हैं और दुनिया में किस देश के पास सबसे ज्यादा हैकर्स हैं...
हैकर केवल अपराधी नहीं होते। ब्लैक हैट हैकर्स: गैरकानूनी तरीके से सिस्टम तोड़ते हैं। व्हाइट हैट (एथिकल) हैकर्स: सुरक्षा खामियों को सुधारने में मदद करते हैं। ग्रे हैट: दोनों के बीच की श्रेणी। जब “सबसे ज्यादा हैकर्स” की बात होती है, तो आमतौर पर ब्लैक हैट और स्टेट-स्पॉन्सर्ड गतिविधियों का संदर्भ लिया जाता है।
हैकिंग की लिस्ट में पहले नंबर पर चीन का नाम आता है। कोई सटीक संख्या तो नहीं है लेकिन चीन में काफी हैकर्स हैं जो सरकार के साथ और निजी तौर पर भी काम करते हैं। चीन पर अक्सर स्टेट-स्पॉन्सर्ड साइबर जासूसी के आरोप लगते रहे हैं। बौद्धिक संपदा (IP) चोरी, इंडस्ट्रियल स्पाइंग और सरकारी नेटवर्क्स पर हमलों के मामलों में चीन का नाम कई अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स में सामने आया है, हालांकि चीन इन आरोपों से इनकार करता रहा है।
चीन का बाद रूस दूसरा ऐसा देश है जिसके पास हैकर्स की सबसे बड़ी सेना है। वैश्विक स्तर पर रूस का नाम लंबे समय से साइबर अपराधों से जुड़ा रहा है। कई बड़े रैनसमवेयर अटैक, बैंकिंग ट्रोजन और फिशिंग नेटवर्क रूसी-भाषी अंडरग्राउंड फोरम्स से जुड़े बताए जाते हैं।
उत्तर कोरिया के हैकर ग्रुप्स जैसे क्रिप्टोकरेंसी चोरी से जुड़े नेटवर्क। कम संसाधनों के बावजूद हाई-प्रोफाइल साइबर हमलों के लिए जाने जाते हैं। क्रिप्टो एक्सचेंज हैक और फंड जुटाने के आरोप इसे अलग पहचान देते हैं। अधिकतर क्रिप्टो हैकिंग में उत्तर कोरिया के ही हैकर्स का नाम सामने आया है।
अमेरिका में इंटरनेट यूज़र्स और टेक कंपनियों की संख्या बहुत अधिक है। इसी वजह से यहां एथिकल हैकर्स की संख्या भी सबसे ज्यादा मानी जाती है। साथ ही, साइबर हमलों के स्रोत और लक्ष्य-दोनों के रूप में अमेरिका का नाम अक्सर रिपोर्ट्स में आता है।
भारत में आईटी प्रोफेशनल्स और साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट्स की बड़ी संख्या है। जहां एक ओर एथिकल हैकिंग और साइबर सिक्योरिटी में भारत मजबूत बन रहा है, वहीं ऑनलाइन ठगी, फिशिंग और सोशल इंजीनियरिंग जैसे अपराध भी बढ़े हैं। इससे भारत का नाम भी साइबर गतिविधियों के संदर्भ में लिया जाने लगा है।
“सबसे ज्यादा हैकर्स” का कोई आधिकारिक वैश्विक आंकड़ा नहीं है। इसके कई कारण हैं जैसे- साइबर गतिविधियां गुप्त होती हैं, IP और लोकेशन छिपाई जाती है, एथिकल और क्रिमिनल हैकर्स में फर्क होता है और किसी देश के मामले में यह तय करना मुश्किल है कि कौन एथिकल है और क्रिमिनल। इसलिए किसी देश के हैकर्स की सटीक संख्या बताना मुश्किल है।