शीतला माता को समर्पित यह अष्टमी व्रत बहुत पवित्र मानी जाती है। संतान की रक्षा और रोगों से मुक्ति के लिए यह दिन महत्व रखता है। इस दिन घर में पहले से बनी रोटी खाना अच्छा माना जाता है। इस दिन रसोई में तवा गर्म नहीं किया जाता है।
सोम, मंगलवार, या बुधवार को सूर्य का मकर राशि में प्रवेश हिन्दू धर्म में अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन तवा गरम करना व घर में तवा से रोटी बनाना अशुभ माना जाता है, क्योंकि यह दिन धूप, संकल्प और सूर्य देव को समर्पित होता है। परिवार में तिल-मिठाई और खिचड़ी का विशेष प्रसाद बनाकर सूर्य को अर्घ्य देना श्रेष्ठ समझा जाता है।
नाग देवताओं की पूजा का यह दिन विशेष श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। घर में सांप देवता के लिए दूध, केसर चावल आदि अर्पित करते हैं और उन्हें प्रसन्न मानते हैं। तवा चढ़ाकर रोजमर्रा की रोटी बनाना इस दिन अच्छा फल नहीं देता, इसलिए पूजा का प्रसाद पहले से ही तैयार रखें।
शरद ऋतु की पूर्णिमा में रात को चांद की रोशनी में शुभ फल के लिए खीर रखी जाती है। हालांकि इस दिन तवा गरम कर रोटी बनाना अशुभ माना जाता है।
दिवाली को लक्ष्मी माता और प्रकाश की विजय का पर्व माना जाता है। इस दिन के लिए घर में दीपक, पूजा-भोजन, पूजा सामग्री पहले से तैयार कर लेना अच्छा रहेगा। शाम को तवा गरम कर रोटी बनाना/नया आटा छानना अशुभ माना जाता है। इसलिए शुभ भोजन पहले तैयार रखें।
यह पितरों की स्मृति में समर्पित काल है जिसमें विशेष तर्पण और श्रद्धा का विधान होता है। घर में तवा गरम कर रोटी बनाना या नया आटा छानना अशुभ माना जाता है, पहले से बना भोजन अर्पित करें। श्राद्ध के दिनों में संयम, दान-पुण्य और पूर्वजों की स्मृति शुभ मानी जाती है।
ऐसी स्थिति में पहले से बनाया भोजन (पूरी-हलवा, खीर, दाल-भात) रखना श्रेष्ठ रहता है। पूजा-भोजन, प्रसाद या तर्पण सामग्री सुबह-शाम समय अनुसार तैयार करें।