सुनीता विलियम्स ने अपनी मां बोनी पांड्या से संपर्क किया और उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी सुरक्षित वापसी होगी। इस दौरान सुनीता विलियम्स ने मां को तकनीकी खामियों के बारे में भी बताया। (फोटो साभार: NASA/AP)
अंतरिक्ष में इंटरनेट और मोबाइल टॉवर दोनों की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में आखिर अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी पर संपर्क कैसे करते हैं? दरअसल, अंतरिक्ष कम्युनिकेशन एंड नैविनेशन के जरिए संपर्क साधा जाता है। (फोटो साभार: NASA/AP)
अंतरिक्ष यात्री के साथ संपर्क साधना कठिन है, लेकिन अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा लंबे समय से संचार प्रणाली को आसान बनाने के काम में जुटी हुई है। हालांकि, अब स्थिति में सुधार हुआ है। (फोटो साभार: NASA/AP)
हाल के वर्षों में तकनीक बेहद एडवांस हुआ है और अंतरराष्ट्रीय स्पेस स्टेशन (ISS) से लेकर तमाम तरह के मिशन से संपर्क साधने के लिए नासा के स्पेस कम्युनिकेशन एंड नैविगेशन सिस्टम का इस्तेमाल होता है। (फोटो साभार: NASA/AP)
आईएसएस से ट्रैकिंग एंड डेटा रिले सैटेलाइट्स (TDRS) की मदद से संपर्क साधा जाता है। TDRS से न्यू मेक्सिको और गुवाम में स्थित सैटेलाइट को सिग्नल भेजे जाते हैं। (फोटो साभार: NASA/AP)
तीन TDRS को पृथ्वी की कक्षा में कुछ इस प्रकार स्थापित किया गया है कि चौबीसों घंटे संचार की सुविधा उपलब्ध रहे।
सुनीता विलियम्स और बुच विल्मोर की अगले साल फरवरी में वापसी हो सकती है। इस साल जून में बोइंग स्टारलाइनर अंतरिक्ष यान की मदद से स्पेस के लिए रवाना हुईं, लेकिन 8 दिनों के मिशन पर गईं सुनीता की तकनीकी खामियों की वजह से वापसी नहीं हो पाई। (फोटो साभार: NASA/AP)