आईआईटी मद्रास ने रेल मंत्रालय की मदद से 422 मीटर लंबा एक ट्रैक तैयार किया है और यह कोई आम ट्रैक नहीं, बल्कि हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक है। इससे पहले ऐसा कोई भी हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक नहीं बनाया गया है।
तेजी से बदलते दौर में सफर का समय धीरे-धीरे कम हुआ है। राजधानी से वंदे भारत तक का सफर तय करने वाले यात्री जल्द ही 350 किमी के सफर को 30 मिनट में पूरा कर सकेंगे। हालांकि, अभी महज 422 मीटर लंबा टेस्ट ट्रैक ही तैयार हो सका है।
हाइपरलूप तकनीक एक एडवांस ट्रांसपोर्ट सिस्टम है जिसमें ट्रेन एक खास ट्यूब में फर्राटा भरती है। इस तकनीक के जरिए यात्री बेहद कम समय में एक सुरक्षित सफर का अनुभव कर सकते हैं।
हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक की सफल टेस्टिंग के बाद ट्रांसपोर्ट सिस्टम पूरी तरह से बदल सकता है। हाइपरलूप, एक हाई स्पीड ट्रांसपोर्ट सिस्टम है, में ट्रेन 1100 किमी प्रति घंटे तक की रफ्तार पकड़ सकती है। इस तकनीकि में ऊर्जा भी कम लगती है और प्रदूषण भी नहीं होता है।
रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की ओर से हाइपरलूप टेस्ट ट्रैक से जुड़ा वीडियो साझा करने के बाद ऐसा माना जा रहा है कि रेलवे जल्द ही पहली हाइपरलूप परियोजना को शुरू करने की योजना बना रहा है।