आग लगने से युद्धपोत को काफी नुकसान हुआ है। नौसेना के अनुसार, रविवार शाम को आग लगने की घटना के बाद एक कनिष्ठ नाविक लापता है और बचाव दल उसे खोजने की कोशिश कर रहे हैं। आग की घटना के बाद युद्धपोत एक ओर (बंदरगाह की ओर) झुक गया।
आईएनएस ब्रह्मपुत्र स्वदेशी रूप से निर्मित पहला निर्देशित मिसाइल युद्धपोत है। इसे अप्रैल 2000 में भारतीय नौसेना में शामिल किया गया था और यह नौसेना की ताकत बना हुआ है।
आईएनएस ब्रह्मपुत्र का वजन करीब 5,300 टन है। इसकी लंबाई 125 मीटर और चौड़ाई 14.4 मीटर है। यह समुद्र में 27 नॉट से अधिक की गति से चल सकता है।
आईएनएस ब्रह्मपुत्र पर 40 अधिकारियों और 330 नाविकों का दल सवार होता है। ये युद्धपोत मध्यम दूरी, निकट दूरी और सतह से सतह व सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलों और टारपीडो लांचरों से लैस है।
इस युद्धपोत पर कई तरह के सेंसर भी लगे हैं। चेतक हेलीकॉप्टर भी इससे उड़ान भर सकते हैं। आईएनएस ब्रह्मपुत्र ने 2006 में लेबनान संघर्ष के दौरान ऑपरेशन सुकून में भी अहम भूमिका निभाई थी।
इस युद्धपोत का नाम ब्रह्मपुत्र नदी के नाम पर रखा गया है। जहाज के प्रतीक चिह्न में नीली समुद्री लहरों और भारतीय गैंडे को दिखाया गया है जो इस ताकत को दर्शाता है।