बिहार में बुलेट ट्रेन का एक तो तय स्टेशन है और वो है पटना। बाकी रूट की घोषणा अभी आधिकारिक रूप से नहीं हुई है, लेकिन अगर हम वाराणसी से पटना होते हुए सिलीगुड़ी तक के रूट को देखें तो बिहार के 6 शहर इसके दायरे में आते हैं। जिसमें बक्सर, पटना, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, सहरसा और पूर्णिया शामिल हैं।
वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर को उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल को जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना योजना के रूप में देखा जा रहा है। यह हाई-स्पीड रेल लाइन वाराणसी से शुरू होकर बिहार के विभिन्न हिस्सों से गुजरते हुए पश्चिम बंगाल के सिलीगुड़ी तक जाएगी।
इस परियोजना के विस्तृत रूट, स्टेशनों की संख्या और निर्माण की समय-सीमा को लेकर अंतिम फैसला नहीं हुआ है। फिलहाल यह प्रस्ताव योजना के शुरुआती चरण में है और आगे की तकनीकी अध्ययन, सर्वे और मंजूरी के बाद ही इसकी वास्तविक तस्वीर सामने आएगी। 2026 तक, यह प्रोजेक्ट अभी प्रपोजल स्टेज में है। अभी तक कोई कंस्ट्रक्शन शुरू नहीं हुआ है। DPR और फाइनल अलाइनमेंट अभी जारी नहीं किए गए हैं।
वाराणसी से सिलीगुड़ी तक बुलेट ट्रेन चलने के बाद इन दो शहरों के बीच का यात्रा समय घटकर 3 घंटे से भी कम रह जाएगा, आज की तारीख में यह यात्रा 12 घंटे से ऊपर की है। वाराणसी से सिलीगुड़ी, वाया पटना होते हुए दूरी लगभग 750 किलोमीटर है।
वाराणसी–सिलीगुड़ी हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर से पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार और उत्तरी पश्चिम बंगाल के बीच यात्रा समय काफी कम हो जाएगा। उत्तर बिहार और उत्तर बंगाल के शहरों व कस्बों को हाई-स्पीड रेल नेटवर्क से जोड़ा जाएगा। क्षेत्रीय विकास को गति देते हुए आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा। शिक्षा, स्वास्थ्य सेवाओं और रोजगार के अवसरों तक लोगों की पहुंच बेहतर होगी।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन 15 अगस्त 2027 तक चलने लगेगी। भारत की पहली बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र और गुजरात को जोड़ेगी। मुंबई और अहमदाबाद के बीच चलने वाली इस बुलेट ट्रेन के प्रोजेक्ट पर तेजी से काम चल रहा है और कई चरण पूरे भी हो चुके हैं।
भारत की पहली बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र और गुजरात के कई प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी। यह देश की पहली शिंकानसेन तकनीक आधारित हाई-स्पीड ट्रेन परियोजना है। यह बुलेट ट्रेन महाराष्ट्र में मुंबई (बांद्रा-कुर्ला कॉम्प्लेक्स) से शुरू होकर ठाणे और विरार होते हुए गुजरात में प्रवेश करेगी। इसके बाद यह वापी, बिलीमोरा, सूरत, भरूच, वडोदरा, आणंद और अहमदाबाद से गुजरते हुए साबरमती तक पहुंचेगी।