नीलम घाटी PoK में मुजफ्फराबाद के उत्तर और उत्तर-पूर्व में है। समुद्र तल से 4000 मीटर की ऊंचाई पर बसी नीलम घाटी की खूबसूरती मन मोह लेती है। यहां का सुहावना मौसम ट्रैकिंग के लिए शानदार है। LOC के करीब होने के कारण यहां विदेशी विशेषतौर पर भारतीय पर्यटकों को नहीं जाने दिया जाता है।
यह जगह मुजफ्फराबाद से करीब 74 किमी दूर है। यहीं पर जागरण नाला आकर नीलम नदी से मिलता है। इस जगह को ट्रॉट मछली पकड़ने के लिए तैयार किया गया है।
कुंदल शाही से करीब 3 किमी की दूरी पर सलखाला है। यहां पर ट्रॉट मछलियों को पाला जाता है। यहां पर पर्यटकों के ठहरने के लिए व्यवस्था है।
नीलम से करीब 13 किमी दूर 1615 मीटर की ऊंचाई पर दोवारियां है। यह क्षेत्र शंकुधारी पेड़ों से सदा हरा-भरा रहता है। पश्चिम की तरफ करीब 30 किमी का खच्चर ट्रैक रत्तीगली पास को नीलम और खागन वैली से जोड़ता है।
1981 मीटर की ऊंचाई पर यह हरा-भरा क्षेत्र बेहद मनमोहक है और दोवारियां से सिर्फ 30 किमी दूर है। शारदी और नारदी नाम के दो पर्वत इस घाटी की सुंदरता को कई गुना बढ़ा देते हैं।
यहां पर कई झरने और हरे-भरे पेड़ों से ढके पहाड़ी ढलान बहुत ही खूबसूरत हैं। शारदा के पूर्व में नीलम नदी में सुरगन नाला आकर मिलता है और यहां से निकलने वाला ट्रैक नुरिनार पास तक जाता है।
केल के पास 8379 फीट की ऊंचाी पर बसा यह गांव एक पर्यटन स्थल भी है। इस गांव तक आने के लिए केल से किमी का ट्रैक है।
आरंग केल इस नीलम घाटी के सबसे खूबसूरत गांवों में से है। यहां दूर-दूर तक हरियाली और घास के मौदान पहाड़ों पर घने पेड़ों के करीब जाकर खत्म होते हैं।
केल से करीब 49 किमी दूर यह बॉर्डर इलाके का गांव है। यहां बहुत ही खूबसूरत हलमत के अलावा जनवाई और सरदारी की खूबसूरती भी मन मोह लेती है।
यह नीलम घाटी का सबसे दूरस्त इलाका है और मुजफ्फराबाद से करीब 200 किमी और केल से 39 किमी दूर है।