यूपी, बिहार और झारखंड जैसे राज्य में मकर संक्रांति पर दही चूड़ा खाने की पुरानी परंपरा है। दही चूड़ा स्वादिष्ट होने के साथ ही बहुत पौष्टिक भी होता है।
चूड़ा जिसे चिवड़ा या फिर पोहा भी कहा जाता है, चावल से बनता है। मकर संक्रांति पर नई फसल घर पर आती है। पुराने समय में नई फसल के चावल से बना चूड़ा ही खाने के लिए उपलब्ध रहता था। तब लोग चूड़े में दही डालकर खाया करते थे। धीरे-धीरे यह आदत परंपरा का हिस्सा बन गई।
पहले दही आसानी से उपलब्ध होता था। दही में प्रोटीन, कैल्शियम और अच्छे बैक्टीरिया होते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाते हैं। पुराने समय में किसानों को दही-चूड़ा खाने से खेतों में काम करने के लिए ताकत मिला करती थी। जल्दी थकावट महसूस नहीं होती। इसी कारण दही और चूड़ा खाने का चलन बढ़ता गया।
चूड़ा को साफ पानी में दो मिनट भिगो लें। फिर उसे छान लें। अब भीगे हुए चूड़े में दही मिलाएं। अपने स्वाद के हिसाब से चीनी या गुड़ डालें और सबको अच्छी तरह से मिक्स कर लें। यूं फटाफट तैयार हो गया स्वादिष्ट दही चूड़ा।
अगर आपको दही चूड़े का स्वाद बढ़ाना है तो आप उसके साथ आलू गोभी और मटर की सब्जी खा सकते हैं। बहुत से लोग दही चूड़ा के साथ तिल के लड्डू भी खाते हैं।
फाइबर से भरपूर होने के कारण चूड़ा गट हेल्थ को इम्प्रूव करता है। शरीर को एनर्जी देता है। दही चूड़ा में प्रचुर मात्रा में आयरन होने से शरीर में खून की कमी भी नहीं होती। मकर संक्रांति के दौरान ठंड चरम पर होती है। ऐसे में दही चूड़ा शरीर को गर्म भी रखता है।
वहीं धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मकर संक्रांति पर सूर्य मकर में प्रवेश करते हैं। माना जाता है कि इस दिन अगर आप सफेद चीज का सेवन करते हैं, तो इससे चंद्रमा और शुक्र दोनों मजबूत होते हैं।