जब माता-पिता हर छोटी बड़ी बात में दखल देते हैं तो बच्चे को अपनी पहचान खोती हुई महसूस होती है। लगातार नियंत्रण उसे भीतर से विद्रोही बना सकता है।
बार-बार दूसरों से तुलना बच्चे के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाती हैं। इससे बच्चे में हीनभावना या विद्रोही स्वभाव जन्म लेता है, जो आगे चलकर विरोध के रूप में सामने आता है।
हर गलती पर कड़ी सजा या अपमान बच्चे में डर तो पैदा करता है, लेकिन सम्मान नहीं। डर पर टिके रिश्ते लंबे समय तक स्वस्थ नहीं रहते और बच्चा मौका मिलते ही विरोध करता है।
अगर आप बच्चे से बराबर बातचीत नहीं करते तो वह अपनी भावनाएं भीतर दबाने लगता है। जब उसे सुना नहीं जाता, तो वह अपनी बात मनवाने के लिए आक्रामक या बागी रुख अपना सकता है।
भौतिक सुविधाएं देना काफी नहीं है। यदि माता-पिता समय और भावनात्मक समर्थन नहीं देते, तो बच्चा खुद को अकेला महसूस करता है। यह अकेलापन उसे गलत संगति या विद्रोही व्यवहार की ओर ले जा सकता है।
जब माता-पिता खुद नियम तोड़ते हैं लेकिन बच्चे से अनुशासन की उम्मीद रखते हैं, तो बच्चा इसे अन्याय मानता है। यह विरोध का बीज बो सकता है।
हर बच्चा सम्मान और समझ चाहता है। सख्ती जरूरी है, लेकिन उसके साथ भरोसा और प्यार भी उतना ही जरूरी है।