कोल तार का उपयोग दशकों से त्वचा और सिर की गंभीर समस्याओं के इलाज के लिए किया जा रहा है। यह शैंपू स्कैल्प की कोशिकाओं के अत्यधिक उत्पादन को धीमा करता है, जिससे पपड़ी जमना और सूजन की समस्या कम होने लगती है।
स्कैल्प सोरायसिस में त्वचा की कोशिकाएं बहुत तेजी से बढ़ने लगती हैं, जिससे मोटी पपड़ियां और लाल चकत्ते बनने लगते हैं। कोल तार इन कोशिकाओं की ग्रोथ को नियंत्रित करता है। इसके अलावा, यह रूसी पैदा करने वाले फंगस से लड़कर सिर की खुजली और जलन को शांत करने में मदद करता है।
इस मेडिकल शैंपू का इस्तेमाल सामान्य शैंपू की तरह रोज नहीं किया जाता है। डॉक्टर आमतौर पर इसे हफ्ते में दो से तीन बार लगाने की सलाह देते हैं। शैंपू को सिर पर लगाने के बाद 5 से 10 मिनट के लिए छोड़ना जरूरी होता है ताकि यह स्कैल्प की गहराई तक जाकर अपना असर दिखा सके।
कोल तार शैंपू का इस्तेमाल करने के बाद स्कैल्प सूरज की रोशनी के प्रति अधिक संवेदनशील हो जाता है। इसलिए, शैंपू करने के तुरंत बाद तेज धूप में निकलने से बचना चाहिए। यदि बाहर जाना जरूरी हो, तो छाता का उपयोग करें या सिर को अच्छी तरह ढक लें ताकि सनबर्न से बचाव हो सके।
चूंकि यह एक औषधीय उत्पाद है, इसलिए इसके कुछ हल्के साइड इफेक्ट्स भी हो सकते हैं। इससे सिर की त्वचा में हल्की ड्राइनेस, जलन या अस्थायी रूप से बालों के रंग में बदलाव आ सकता है। यदि खुजली या लालिमा ज्यादा बढ़ जाए, तो तुरंत इसका उपयोग बंद कर देना चाहिए।
कोल तार का रंग और गंध थोड़ी तेज होती है, जो कई लोगों को असहज लग सकती है। इसके इस्तेमाल से हल्के रंग के बालों में हल्का पीलापन आ सकता है और तौलिये या कपड़ों पर दाग भी लग सकते हैं। इसलिए इसे धोते समय सावधानी बरतना और अच्छी तरह से पानी से खंगालना बहुत जरूरी है।
किसी भी ओवर-द-काउंटर कोल तार शैंपू को खरीदने से पहले त्वचा विशेषज्ञ से परामर्श करना हमेशा समझदारी होती है। डॉक्टर आपकी समस्या की गंभीरता को देखकर सही प्रतिशत वाला कोल तार शैंपू सुझाते हैं, जिससे आप बिना किसी नुकसान के स्वस्थ और साफ स्कैल्प पा सकते हैं।