दिवाली से पहले व्यापारियों के लिए राहत की खबर है। चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (CTI) की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) ने UPI के जरिए दुकानदारों को किए जाने वाले भुगतान पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला दिवाली के बाद तक टाल दिया है। NPCI की UPI एंड सर्विसेज स्टीयरिंग कमेटी ने 13 अक्टूबर को यह फैसला लिया। इसे लागू करने की नई तारीख अलग से घोषित की जाएगी। CTI ने इस फैसले का स्वागत करते हुए इसे व्यापारियों की एकता की जीत बताया है।
क्या है MDR, जिससे व्यापारियों को थी चिंता?
MDR वह शुल्क है, जो डिजिटल भुगतान स्वीकार करने वाले व्यापारी से भुगतान सेवा से जुड़े प्रावधानों के तहत लिया जा सकता है। CTI के मुताबिक, 15 अक्टूबर से UPI के जरिए दुकानदारों को किए जाने वाले भुगतान पर 0.4 फीसदी MDR लागू होने की आशंका थी। संगठन का कहना है कि दिवाली के दौरान दिल्ली में एक लाख करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार होता है और इसमें करीब 80 फीसदी भुगतान UPI से होता है। ऐसे में त्योहारी सीजन के बीच अतिरिक्त शुल्क लागू होने से व्यापारियों पर वित्तीय बोझ बढ़ सकता था।
CTI ने चलाया था 'नो UPI डे' अभियान
CTI चेयरमैन बृजेश गोयल ने कहा कि संगठन दिल्ली और देश के व्यापारियों के साथ MDR के प्रस्ताव का विरोध कर रहा था। इसी विरोध में 2 अक्टूबर को 'नो UPI डे' अभियान भी चलाया गया, जिसमें CTI के मुताबिक हजारों व्यापारियों ने हिस्सा लिया। संगठन ने वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और NPCI को पत्र लिखकर त्योहारी सीजन को देखते हुए फैसले को दिवाली तक टालने की मांग की थी।
CTI बोला- व्यापारियों के लिए राहत की खबर
बृजेश गोयल ने कहा कि दिवाली के दौरान अब व्यापारी बिना किसी अतिरिक्त शुल्क की चिंता के UPI भुगतान स्वीकार कर सकेंगे। उन्होंने इसे दिल्ली के करीब 20 लाख और देशभर के करोड़ों व्यापारियों के लिए राहत बताया। हालांकि, CTI की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, MDR का फैसला स्थायी रूप से वापस नहीं लिया गया है। इसे दिवाली के तुरंत बाद लागू करने की बात कही गई है, लेकिन इसकी तारीख अभी घोषित नहीं हुई है।
