त्योहारों का समय ऐसा होता है जब लोग अपने परिवार और अपनों के सबसे ज्यादा करीब महसूस करना चाहते हैं। यह वह दौर है जो अपनेपन, पारिवारिक मेल-मिलाप और साझा परंपराओं से जुड़ा होता है। जब इस दौरान लोग अपने घर से दूर होते हैं, तो पुरानी यादें और अकेलापन ज्यादा परेशान करने लगता है।
छात्र, युवा पेशेवर और नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में घर से दूर रहने वाले लोग इस स्थिति का सामना करते हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि त्योहारों के समय व्यक्ति जैसी उम्मीद करता है और हकीकत में जैसी उसकी स्थिति होती है, उसके बीच का अंतर अकेलापन और बढ़ा देता है।
अकेलेपन का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इंसान शारीरिक रूप से अकेला है। कोई व्यक्ति दोस्तों या सहकर्मियों के बीच भी हो सकता है, लेकिन अगर उसका दिल अपनों से दूर महसूस करता है, तो वह भीतर से अकेलापन ही महसूस करता है। भावनाओं का यह फासला मानसिक तनाव की वजह बनता है।
आजकल सोशल मीडिया पर लोग अपने परिवार के साथ खुशियां मनाते हुए तस्वीरें और वीडियो साझा करते हैं। इन्हें देखकर दूर रहने वाले लोगों के मन में हीन भावना या तुलना करने की आदत पैदा हो जाती है। उन्हें ऐसा लगने लगता है कि बाकी सब खुश हैं और वे ही इस जश्न से वंचित रह गए हैं, जिससे उदासी और चिड़चिड़ाहट बढ़ने लगती है।
विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि त्योहारों के समय अकेलापन महसूस करना अपने आप में कोई मानसिक विकार नहीं है। यह एक सामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया है। हालांकि, समस्या तब गंभीर हो जाती है जब यह उदासी लंबे समय तक बनी रहती है और व्यक्ति की दिनचर्या को प्रभावित करने लगती है।
घर से दूर रहते हुए भी आप अपनों से जुड़कर इस तनाव को कम कर सकते हैं। परिवार के साथ वीडियो कॉल की योजना बनाएं, दोस्तों के साथ मिलकर खाना खाएं या अपने स्तर पर छोटे-छोटे उत्सव मनाएं। सबसे जरूरी बात यह है कि खुद पर जबरदस्ती खुश रहने का दबाव बिल्कुल न डालें।
घर से दूर होने का मतलब अपनों से पूरी तरह कट जाना नहीं है। उद्देश्य यह नहीं होना चाहिए कि आप अकेलेपन के अहसास को पूरी तरह मिटा दें, बल्कि यह होना चाहिए कि आप अपनी भावनाओं को स्वीकार करें और जहां भी हैं, वहां सकारात्मक और अर्थपूर्ण अनुभव बनाने की कोशिश करें।