त्योहारों पर घर से दूर रहना क्यों बन जाता है मानसिक तनाव का कारण? जानिए क्या कहते हैं मनोचिकित्सक

मनोचिकित्सकों का मानना है कि त्योहारों पर घर से दूर रहना किसी भी व्यक्ति के मानसिक स्वास्थ्य पर गहरा असर डाल सकता है। अकेलापन और उदासी लगातार बनी रहे तो इसका असर व्यक्ति की नींद, भूख, काम में मन लगने की क्षमता और सामान्य जीवन पर भी पड़ने लगता है। आइए जानते हैं कि त्योहारों के समय घर से दूर रहने पर मानसिक स्थिति पर इसका क्या प्रभाव पड़ता है:

Authored by: Suneet SinghUpdated Oct 20 2026, 09:40 IST
​त्योहारों पर क्यों खलती है घर की याद?​Image Credit : IStock01 / 07

​त्योहारों पर क्यों खलती है घर की याद?​

त्योहारों का समय ऐसा होता है जब लोग अपने परिवार और अपनों के सबसे ज्यादा करीब महसूस करना चाहते हैं। यह वह दौर है जो अपनेपन, पारिवारिक मेल-मिलाप और साझा परंपराओं से जुड़ा होता है। जब इस दौरान लोग अपने घर से दूर होते हैं, तो पुरानी यादें और अकेलापन ज्यादा परेशान करने लगता है।

​उम्मीद और हकीकत का अंतर बढ़ाता है अकेलापन​Image Credit : IStock02 / 07

​उम्मीद और हकीकत का अंतर बढ़ाता है अकेलापन​

छात्र, युवा पेशेवर और नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में घर से दूर रहने वाले लोग इस स्थिति का सामना करते हैं। एक्सपर्ट्स कहते हैं कि त्योहारों के समय व्यक्ति जैसी उम्मीद करता है और हकीकत में जैसी उसकी स्थिति होती है, उसके बीच का अंतर अकेलापन और बढ़ा देता है।

​अकेलेपन का मतलब सिर्फ शारीरिक अकेलेपन से नहीं​Image Credit : IStock03 / 07

​अकेलेपन का मतलब सिर्फ शारीरिक अकेलेपन से नहीं​

अकेलेपन का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि इंसान शारीरिक रूप से अकेला है। कोई व्यक्ति दोस्तों या सहकर्मियों के बीच भी हो सकता है, लेकिन अगर उसका दिल अपनों से दूर महसूस करता है, तो वह भीतर से अकेलापन ही महसूस करता है। भावनाओं का यह फासला मानसिक तनाव की वजह बनता है।

​सोशल मीडिया बढ़ा देती हैं उदासी​Image Credit : IStock04 / 07

​सोशल मीडिया बढ़ा देती हैं उदासी​

आजकल सोशल मीडिया पर लोग अपने परिवार के साथ खुशियां मनाते हुए तस्वीरें और वीडियो साझा करते हैं। इन्हें देखकर दूर रहने वाले लोगों के मन में हीन भावना या तुलना करने की आदत पैदा हो जाती है। उन्हें ऐसा लगने लगता है कि बाकी सब खुश हैं और वे ही इस जश्न से वंचित रह गए हैं, जिससे उदासी और चिड़चिड़ाहट बढ़ने लगती है।

​क्या त्योहारों पर उदासी होना कोई मानसिक बीमारी है?​Image Credit : IStock05 / 07

​क्या त्योहारों पर उदासी होना कोई मानसिक बीमारी है?​

विशेषज्ञ यह स्पष्ट करते हैं कि त्योहारों के समय अकेलापन महसूस करना अपने आप में कोई मानसिक विकार नहीं है। यह एक सामान्य भावनात्मक प्रतिक्रिया है। हालांकि, समस्या तब गंभीर हो जाती है जब यह उदासी लंबे समय तक बनी रहती है और व्यक्ति की दिनचर्या को प्रभावित करने लगती है।

​अकेलेपन से निपटने के लिए अपनाएं ये छोटे कदम​Image Credit : IStock06 / 07

​अकेलेपन से निपटने के लिए अपनाएं ये छोटे कदम​

घर से दूर रहते हुए भी आप अपनों से जुड़कर इस तनाव को कम कर सकते हैं। परिवार के साथ वीडियो कॉल की योजना बनाएं, दोस्तों के साथ मिलकर खाना खाएं या अपने स्तर पर छोटे-छोटे उत्सव मनाएं। सबसे जरूरी बात यह है कि खुद पर जबरदस्ती खुश रहने का दबाव बिल्कुल न डालें।

​अपनी भावनाओं को स्वीकार करना है जरूरी​Image Credit : IStock07 / 07

​अपनी भावनाओं को स्वीकार करना है जरूरी​

घर से दूर होने का मतलब अपनों से पूरी तरह कट जाना नहीं है। उद्देश्य यह नहीं होना चाहिए कि आप अकेलेपन के अहसास को पूरी तरह मिटा दें, बल्कि यह होना चाहिए कि आप अपनी भावनाओं को स्वीकार करें और जहां भी हैं, वहां सकारात्मक और अर्थपूर्ण अनुभव बनाने की कोशिश करें।

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!