आजकल खराब लाइफस्टाइल और उल्टा-सीधा खानपान पेट से जुड़ी परेशानियों को बढ़ा रहा है। किसी को कब्ज रहती है, तो कोई बढ़ते वजन से परेशान है। ऐसे में लोग महंगे डाइट प्लान और हेल्थ सप्लीमेंट्स की तरफ भागते हैं, लेकिन कई बार घर की छोटी-सी चीज भी बड़ा फायदा दे सकती है। अगर रोज इस्तेमाल होने वाले गेहूं के आटे को थोड़ा स्मार्ट तरीके से तैयार किया जाए, तो उसकी रोटी शरीर के लिए ज्यादा हेल्दी बन सकती है। हाई फाइबर वाला आटा पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, पाचन बेहतर करता है और वजन कंट्रोल करने में भी मदद कर सकता है।
हमारी रोज की डाइट में फाइबर की कमी होना बहुत आम बात है। यही वजह है कि पेट साफ न होना, गैस बनना और जल्दी भूख लगना जैसी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं। फाइबर वाला खाना धीरे-धीरे पचता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है। यही कारण है कि हेल्थ एक्सपर्ट भी डाइट में फाइबर बढ़ाने की सलाह देते हैं। हाई फाइबर आटे की रोटी खाने से पेट हल्का महसूस हो सकता है और बार-बार खाने की आदत भी कम हो सकती है।
नॉर्मल गेहूं के आटे में कुछ हेल्दी चीजें मिलाकर उसे हाई फाइबर बनाया जा सकता है। इसके लिए आप ओट्स का पाउडर, चने का आटा, अलसी के बीज का पाउडर या थोड़ा इसबगोल मिला सकते हैं। ये चीजें फाइबर से भरपूर होती हैं और आटे की पौष्टिकता बढ़ाने में मदद करती हैं। कोशिश करें कि हर चीज संतुलित मात्रा में मिलाएं ताकि रोटी का स्वाद और टेक्सचर भी अच्छा बना रहे।
हाई फाइबर आटा पेट में जाकर खाने को आसानी से आगे बढ़ाने में मदद करता है। इससे कब्ज की समस्या कम हो सकती है और पेट साफ रहने में मदद मिलती है। फाइबर आंतों की हेल्थ के लिए भी अच्छा माना जाता है। जिन लोगों को खाना खाने के बाद भारीपन महसूस होता है या डाइजेशन कमजोर रहता है, उनके लिए ऐसी रोटी फायदेमंद हो सकती है।
जब पेट लंबे समय तक भरा रहता है, तो बार-बार कुछ खाने की क्रेविंग कम होती है। यही चीज वजन कंट्रोल करने में मदद करती है। हाई फाइबर रोटी शरीर में कैलोरी का बैलेंस बेहतर रखने में सहायक हो सकती है। कई लोग इसे ‘फैट कटर’ की तरह मानते हैं क्योंकि यह ओवरईटिंग कम करने में मदद करती है। हालांकि सिर्फ आटा बदलने से वजन नहीं घटेगा, इसके साथ रोज थोड़ी फिजिकल एक्टिविटी और संतुलित डाइट भी जरूरी है।
अगर आप अपनी डाइट में अचानक बहुत ज्यादा फाइबर शामिल कर लेते हैं, तो शुरुआत में पेट फूलने या गैस जैसी दिक्कत हो सकती है। इसलिए धीरे-धीरे इसकी मात्रा बढ़ाना बेहतर माना जाता है। साथ ही पर्याप्त पानी पीना भी जरूरी है, क्योंकि फाइबर सही तरीके से काम तभी करता है जब शरीर में पानी की कमी न हो। अगर किसी को पहले से कोई पेट या दूसरी स्वास्थ्य समस्या है, तो डाइट बदलने से पहले डॉक्टर की सलाह लेना सही रहेगा।
प्रस्तुत लेख में सुझाए गए टिप्स और सलाह केवल आम जानकारी के लिए हैं और इसे पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जा सकता। किसी भी तरह का फिटनेस प्रोग्राम शुरू करने अथवा अपनी डाइट में किसी तरह का बदलाव करने से पहले अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर लें।