हाई ब्लड प्रेशर यानी हाइपरटेंशन के मरीजों के लिए नवरात्रि व्रत के दौरान खानपान और दिनचर्या का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। लंबे समय तक भूखे रहने, शरीर में पानी की कमी होने से ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखना मुश्किल हो सकता है। ऐसे में कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखकर व्रत के दौरान सेहत का ख्याल रखा जा सकता है।
हाई बीपी के मरीजों को अपनी सेहत और डॉक्टर की सलाह के अनुसार व्रत रखना चाहिए। लंबे समय तक भूखे रहने से कमजोरी, चक्कर और थकान महसूस हो सकती है। बेहतर है कि व्रत के दौरान जरूरत के मुताबिक थोड़ी-थोड़ी मात्रा में पौष्टिक फलाहार लेते रहें।
व्रत में इस्तेमाल होने वाला सेंधा नमक भी सोडियम का स्रोत है। इसका ज्यादा सेवन ब्लड प्रेशर बढ़ा सकता है। इसलिए साबूदाना खिचड़ी, कुट्टू की पूड़ी, आलू और अन्य फलाहारी व्यंजनों में नमक सीमित मात्रा में डालें। पैकेट वाले व्रत के स्नैक्स से भी दूरी बनाएं।
डिहाइड्रेशन यानी शरीर में पानी की कमी से चक्कर, थकान और कमजोरी हो सकती है। यदि आपके डॉक्टर ने तरल पदार्थों पर कोई पाबंदी नहीं लगाई है, तो दिनभर पर्याप्त पानी पिएं। नारियल पानी या बिना अतिरिक्त चीनी वाला पेय भी विकल्प हो सकता है।
व्रत के दौरान कुट्टू की पूड़ी, पकौड़े, चिप्स और तले हुए आलू का अधिक सेवन कैलोरी और वसा बढ़ा सकता है। इनकी जगह उबले आलू सीमित मात्रा में, ताजे फल, दही और कम तेल में तैयार व्यंजन चुनें।
हाई बीपी के मरीज डॉक्टर की सलाह के बिना अपनी दवा बंद न करें और न ही उसके समय या खुराक में बदलाव करें। उपवास के कारण दवा लेने के समय में बदलाव जरूरी लगे, तो पहले डॉक्टर से सलाह लें।
व्रत के दौरान अपने ब्लड प्रेशर की निगरानी करते रहें, खासकर यदि बीपी अक्सर बढ़ता या घटता है। असामान्य रीडिंग आने पर चिकित्सकीय सलाह लें। सीने में दर्द, सांस लेने में परेशानी या बेहोशी जैसे लक्षण हों, तो तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें।