जहरीली हवा का असर सिर्फ फेफड़ों तक सीमित नहीं रहता है। प्रदूषण हमारे दिल की सेहत को भी नुकसान पहुंचा सकता है। खासकर उन लोगों के लिए खतरा ज्यादा हो सकता है, जिन्हें पहले से दिल की बीमारी, हाई ब्लड प्रेशर या डायबिटीज जैसी समस्याएं हैं।
हवा में मौजूद PM2.5 जैसे बेहद छोटे प्रदूषण कण सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकते हैं। ये कण वाहनों के धुएं, कारखानों और दूसरे प्रदूषण स्रोतों से हवा में फैलते हैं। सांस के साथ शरीर में पहुंचने पर ये फेफड़ों में सूजन पैदा कर सकते हैं और शरीर की सामान्य प्रक्रियाओं को प्रभावित कर सकते हैं। वायु प्रदूषण के संपर्क में आने से रक्त वाहिकाओं पर दबाव बढ़ सकता है, सूजन हो सकती है और रक्तचाप पर भी असर पड़ सकता है। कुछ परिस्थितियों में इससे खून के थक्के बनने और दिल की धमनियों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने को हृदय रोगों के जोखिम से जोड़ा जाता है।
जिन लोगों को पहले से दिल की बीमारी है, उन्हें प्रदूषण के दौरान खास सावधानी बरतनी चाहिए। इसके अलावा हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल वाले लोगों को भी सतर्क रहने की जरूरत है। बुजुर्गों और सांस से जुड़ी बीमारियों से परेशान लोगों को भी खराब हवा में अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
इसका मतलब यह नहीं है कि स्वस्थ और कम उम्र के लोगों को कोई खतरा नहीं है। प्रदूषण का असर हर व्यक्ति पर अलग-अलग हो सकता है और लंबे समय तक इसके संपर्क में रहने से जोखिम बढ़ सकता है।
जब हवा की गुणवत्ता खराब हो, तो बाहर लंबे समय तक टहलने या भारी कसरत करने से बचें। खासकर सड़कों और ज्यादा ट्रैफिक वाली जगहों पर व्यायाम करने से परहेज करें। घर के अंदर हवा की गुणवत्ता बेहतर रखने के लिए जरूरत के मुताबिक एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल किया जा सकता है। बाहर निकलना जरूरी हो, तो अच्छी फिटिंग वाला N95 या FFP2 मास्क पहनें। ध्यान रखें कि मास्क प्रदूषण के संपर्क को कम कर सकता है, लेकिन इससे पूरा बचाव सुनिश्चित नहीं होता। AQI पर नजर रखें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार अपनी दवाएं नियमित रूप से लेते रहें।
सीने में दर्द, दबाव या भारीपन, सांस फूलना, ठंडा पसीना आना, चक्कर आना और अचानक कमजोरी महसूस होना हार्ट अटैक के लक्षण हो सकते हैं। कुछ लोगों में जबड़े, पीठ या बांह में दर्द भी हो सकता है। अगर ऐसे लक्षण अचानक दिखाई दें, तो उन्हें गैस या थकान समझकर नजरअंदाज न करें। तुरंत आपातकालीन चिकित्सा सहायता लें। हार्ट अटैक के मामले में समय पर इलाज मिलना बेहद जरूरी है।