प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नया कार्यालय लगभग बनकर तैयार है। वे इस मकर संक्रांति यानी कल से अपने नए दफ्तर में काम शुरू कर सकते हैं। उनका नया कार्यालय 'सेवा तीर्थ' के नाम से जाना जाएगा। ये मोदी सरकार की महात्वाकांक्षी सेंट्रल विस्टा परियोजना के तहत निर्मित किया गया है। इस कॉम्पलेक्स में पीएमओ, कैबिनेट सेक्रेटेरिएट और नेशनल सिक्योरिटी काउंसिल सेक्रेटेरिएट का काम होगा। तीनों को यहां अलग-अलग बिल्डिंग दी जाएगी। पीएमओ के इस नए जगह पर शिफ्ट होना केवल एक कार्यालय का शिफ्ट होना नहीं है, बल्कि एक ऐतिहासिक बदलाव भी है। बता दें कि इस बदलाव के साथ एक युग का अंत हो जाएगा, क्योंकि यह 1947 में भारत की आजादी के बाद से साउथ ब्लॉक में था। एक खास बात यह भी है कि इसी इलाके में पीएम आवास का भी निर्माण चल रहा है, जैसे ही इसका काम पूरा हो जाएगा उसके बाद प्रधानमंत्री का निवास स्थान भी बदल जाएगा। हालांकि ये पहली बार नहीं होगा जब भारत में किसी प्रधानमंत्री का आवास बदलेगा। यह पहले भी हो चुका है। आज हम आपको यही बताएंगे कि भारत के आजाद होने के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास कहां था? साथ ही यह भी कि तबसे कितनी बार पीएम आवास बदल चुका है।
भारत 1947 में आजाद हुआ। आजादी के बाद देश के पहले प्रधानमंत्री के रूप में पंडित जवाहर लाल नेहरू ने शपथ ली। इसके बाद बात आई कि देश के प्रधानमंत्री का आधिकारिक आवास कहां होगा। प्रधानमंत्री के लिहाज से एक ऐसा स्थान चाहिए था, जो पद की गरिमा के अनुकूल हो, फिर तय हुआ कि पीएम का आधिकारिक आवास तीन मूर्ति भवन होगा। अंग्रेजों के समय में ये भवन सेना के कमांडर इन चीफ का घर हुआ करता था। बाद में जब 1964 में पंडित नेहरू का देहांत हुआ और फिर 1984 में ये भवन नेहरू मेमोरियल संग्रहालय बना दिया गया।
फिर जब देश के दूसरे प्रधानमंत्री के रूप में लाल बहादुर शास्त्री ने शपथ ग्रहण की तो उन्होंने अपना आधिकारिक निवास 10 जनपथ को बनाया। वे 1964 से 1966 तक वहीं रहते रहे। हालांकि 10 जनपथ ज्यादा दिन तक पीएम आवास नहीं रहा। फिर 10 जनपथ को कांग्रेस पार्टी को दे दिया गया
फिर जब इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनी तो उनका आधिकारिक आवास सफदरजंग रोड़ स्थित एक बंगला बना। उनसे पहले, इस बंगले में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश सुधीरंजन दास रहा करते थे। इंदिरा ताउम्र इसी बंगले में रही।इसी बंगले के बगीचे में 31 अक्टूबर 1984 में उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गई। इंदिरा की मौत के बाद इस बंगले को इंदिरा गांधी मेमोरियल म्यूजियम में बदल दिया गया। यहाँ राष्ट्रीय आंदोलन की दुर्लभ तस्वीरें, नेहरू-गांधी परिवार के व्यक्तिगत पल और इंदिरा गांधी के बचपन से जुड़ी वस्तुएं प्रदर्शित हैं।
1984 में इंदिरा गांधी की मौत के बाद उनके बेटे राजीव गांधी ने इस देश की बागडोर संभाली। पीएम बनने के बाद उन्होंने सेवन आरसीआर यानी सेवन रेसकोर्स को अपने आवास के रूप में चुना। फिर जब वीपी सिंह प्रधानमंत्री बने तो उन्होंने इसे प्रधानमंत्री के आवास के लिए आधिकारिक तौर पर इसका एलान किया। तब से लेकर अभी तक सभी प्रधानमंत्री इसी सेवन रेस कोर्स में रहते आए हैं। समय के साथ साथ इसे और अत्याधुनिक किया गया है। 1984 से प्रधानमंत्रियों का घर बने इस बंगले का नक्शा ब्रिटिश वास्तुकार रॉबर्ट टॉर रसेल ने बनाया था। वे 1920 और 1930 के दशक के दौरान नई दिल्ली का नक्शा तैयार कर रहे ब्रिटिश वास्तुकार एडविन लुटियन की टीम में थे।
नरेंद्र मोदी जब 26 मई,2014 में पीएम बने तो वे भी इसी बंगले में शिफ्ट हुए थे। ये बंगला 1980 में बनकर तैयार हुआ था। सितंबर, 2016 में इसका नाम बदलकर सात लोक कल्याण मार्ग कर दिया गया था। प्रधानमंत्री आवास के नाम से जाने जाने वाले इस बंगले में एक नहीं बल्कि पांच बंगले हैं। इन सबको मिलाकर एक साथ प्रधानमंत्री आवास 7, लोक कल्याण मार्ग कहा जाता है। इनमें प्रधानमंत्री कार्यालय और निवास के अलावा सुरक्षाबल एसपीजी आवास कक्ष और गेस्ट हाउस भी शामिल हैं। इतना ही नहीं, इसमें हेलीपैड़ भी है जो 2003 से उपयोग में लिया जा रहा है। यह पूरा एरिया नो फ्लाइंग जोन है। यहां सुरक्षा के खास इंतजाम है। हालांकि अब एक बार फिर जल्द ही प्रधानमंत्री आवास का पता बदल जाएगा।
अब जब सेंट्रल विस्टा परियोजना का काम पूरा हो जाएगा, तब पीएम कार्यालय और उनका आवास दोनों एक ही जगह होगा।