पृथ्वी का आखिरी छोर कहां है, भारत से कितनी है दूर

Where is the farthest corner of the earth and how far is it from india: खुराफाती दिमाग में अक्सर ऐसे सवाल आते हैं, कि जो अजीब लगते हैं, लेकिन जानने में मजा आता है। या यूं कहें कि सोचने पर मजबूर कर दें जैसे, “पृथ्वी का आखिरी छोर आखिर कहां है?” या “धरती कहां पर खत्म होती है”

Authored by: नीलाक्ष सिंहUpdated Apr 22 2026, 14:17 IST
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पृथ्वी का आखिरी छोर कहां है, भारत से कितनी है दूर

असल में, पृथ्वी गोल है, इसलिए तकनीकी तौर पर इसका कोई “अंतिम किनारा” नहीं है। फिर भी, दुनिया में एक ऐसी जगह है जिसे लोग प्रतीकात्मक रूप से “धरती का आखिरी छोर” मानते हैं। दिलचस्प बात यह है कि यह जगह भारत से बहुत दूर नहीं है।

दुनिया की आखिरी सड़क का सफरImage Credit : Canva02 / 07

दुनिया की आखिरी सड़क का सफर

यूरोप के खूबसूरत देश नॉर्वे में एक सड़क है, जिसका नाम है E-69 हाईवे। इसे “दुनिया की आखिरी सड़क” कहा जाता है। यह सड़क आपको ले जाती है नॉर्थ केप तक, जो यूरोप का सबसे उत्तरी छोर है।

भारत से कितनी है दूरImage Credit : Canva03 / 07

भारत से कितनी है दूर

भारत से लगभग 6,900 किलोमीटर दूर स्थित इस जगह तक आप करीब 12 घंटे की फ्लाइट में पहुंच सकते हैं। वहां से E-69 हाईवे का सफर शुरू होता है, जो लगभग 14 किलोमीटर लंबा है, लेकिन यह छोटा सा रास्ता जिंदगी भर याद रहने वाला अनुभव बन जाता है।

जहां सड़क खत्म…रोमांच शुरूImage Credit : Canva04 / 07

जहां सड़क खत्म…रोमांच शुरू

E-69 हाईवे का अंत बेहद खास है। जैसे-जैसे आप आगे बढ़ते हैं, सड़क धीरे-धीरे खत्म होती नजर आती है और सामने बर्फ से ढके ग्लेशियर और विशाल समुद्र दिखाई देते हैं। ऐसा लगता है जैसे धरती यहीं आकर थम गई हो।

छह महीने का दिन छह महीने की रातImage Credit : Canva05 / 07

छह महीने का दिन छह महीने की रात

यहां का मौसम भी उतना ही अनोखा है। गर्मियों में भी तापमान लगभग 0°C के आसपास रहता है, जबकि सर्दियों में यह -45°C तक गिर सकता है। उत्तरी ध्रुव के करीब होने के कारण यहां एक और अनोखा नजारा देखने को मिलता है, गर्मियों में लगातार छह महीने दिन और सर्दियों में छह महीने रात!

क्यों खास है यह जगह?Image Credit : Canva06 / 07

क्यों खास है यह जगह?

जब आप नॉर्थ केप पर खड़े होते हैं, तो चारों ओर फैले ग्लेशियर, ठंडी हवाएं और अंतहीन समुद्र आपको एक अलग ही दुनिया का एहसास कराते हैं। ऐसा लगता है जैसे आप सचमुच धरती के किनारे खड़े हों। यही वजह है कि दुनियाभर के एडवेंचर लवर्स, फोटोग्राफर्स और प्रकृति प्रेमी यहां खिंचे चले आते हैं।

इतिहास की झलकImage Credit : Canva07 / 07

इतिहास की झलक

आज भले ही यहां पहुंचना आसान हो गया हो, लेकिन पहले यह इलाका बेहद दुर्गम था। 1930 के बाद यहां विकास शुरू हुआ, जिसके चलते अब यह जगह दुनिया के नक्शे पर एक अनोखी पर्यटन डेस्टिनेशन बन चुकी है।

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