देश के सबसे छोटे एक्सप्रेसवे की लंबाई मात्र 18 किलोमीटर है। और इसका मुख्य उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्ग 53 पर ट्रैफिक के दबाव को कम करना है। जबकि द्वारका एक्सप्रेसवे की लंबाई 28 किलोमीटर है।
18 किलोमीटर वाला भारत का सबसे छोटा एक्सप्रेसवे दुर्ग बाईपास एक्सप्रेसवे है। यह छत्तीसगढ़ में मौजूद है। यह एक्सप्रेसवे भिलाई और दुर्ग शहर के ट्रैफिक को कम करता है और महाराष्ट्र-ओडिशा आने-जाने वाले वाहनों को सीधा मार्ग प्रदान करता है।
दुर्ग एक्सप्रेसवे रायपुर, भिलाई, दुर्ग और राजनांदगांव के बीच एक निर्बाध कॉरिडोर का काम करता है। इस एक्सप्रेसवे के कारण राज्य के प्रमुख औद्योगिक केंद्रों की दूरी कम हो जाती है।
इसके निर्माण से दुर्ग और भिलाई शहर के भीतर लगने वाले भारी ट्रैफिक जाम में भारी कमी आई है, खासकर भारी मालवाहक ट्रकों का प्रवेश शहर में कम हुआ है।
दुर्ग बाईपास एक्सप्रेसवे के उपयोग से रायपुर से राजनांदगांव के बीच के सफर में लगभग 30 से 45 मिनट की बचत होती है। लोग बिना रुके यात्रा कर पाते हैं।
इस मार्ग पर दुर्घटनाओं को कम करने के लिए आधुनिक साइनेज, लाइटिंग और सुरक्षा बैरियर लगाए गए हैं, जो इसे एक हाई-स्पीड सुरक्षित कॉरिडोर बनाते हैं।
कई मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, 28 किलोमीटर का द्वारका एक्सप्रेसवे भारत का सबसे छोटा एक्सप्रेसवे है, लेकिन यह गलत है। दुर्ग एक्सप्रेसवे द्वारका एक्सप्रेसवे से भी छोटा है और इसकी लंबाई मात्र 18 किलोमीटर है, जिससे यह देश का सबसे छोटा एक्सप्रेसवे बन जाता है