विश्व पृथ्वी दिवस हर साल 22 अप्रैल को मनाया जाता है, ये दुनिया के सबसे बड़े पर्यावरण आंदोलन में से एक है। यह जलवायु परिवर्तन, प्रदूषण और जैव विविधता के नुकसान जैसे गंभीर मुद्दों पर ध्यान देता है। इस Important Day पर कुछ नया पढ़ते हैं...पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, ये बात आज हमें obvious लगती है, लेकिन इसे समझने में सदियां लग गईं। हालांकि, पृथ्वी और अंतरिक्ष से जुड़ी खोजें आज भी जारी हैं, लेकिन सोचिए जब आधुनिक तकनीक नहीं थी, तब वैज्ञानिकों ने कैसे पता लगाया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है? World Earth Day 2026 पर जानें अनोखा किस्सा। (image - chatgpt)
हर 24 घंटे में दिन बदल जाता है। इन 24 घंटे में हमें दिन भी देखने को मिलता है और रात भी। इसका कारण है पृथ्वी का लगातार घूमना। अगर पृथ्वी नहीं घूमती, तो एक हिस्सा हमेशा दिन में और दूसरा हमेशा रात में रहता। हालांकि तब जीवन होता कि नहीं, ये कह पाना मुश्किल है। बहरहाल, हम इस लेख के माध्यम से जानने की कोशिश करेंगे कि कैसे पता चला कि पृथ्वी घूम रही है।
8 जनवरी 1851 को फ्रांसीसी वैज्ञानिक Léon Foucault ने नोटिस किया कि परछाई की दिशा और लंबाई बदलती रहती है, उन्होंने एक ऐसा प्रयोग किया जिसने दुनिया को चौंका दिया। उन्होंने Foucault Pendulum (लंबा झूलता पेंडुलम) बनाकर यह दिखाया कि पृथ्वी अपनी धुरी पर लगातार घूम रही है।
यह पेंडुलम एक निश्चित दिशा में झूलता रहता है, लेकिन पृथ्वी के घूमने के कारण उसकी दिशा धीरे-धीरे बदलती दिखाई देती है। यही बदलाव पृथ्वी के रोटेशन का प्रत्यक्ष प्रमाण बना। इस ऐतिहासिक प्रयोग को Panthéon (पेरिस) और Paris Observatory में प्रदर्शित किया गया, जहां लोगों ने अपनी आंखों से इस प्रयोग को देखा और जाना कि पृथ्वी घूम रही है।
470 ईसा पूर्व में यूनानी दार्शनिकों ने यह विचार दिया था कि पृथ्वी घूमती है, लेकिन वे इसे साबित नहीं कर पाए। कई सदियों तक यह सिर्फ एक सिद्धांत ही बना रहा।फिर 1851 में फ्रांसीसी वैज्ञानिक Léon Foucault के प्रयोग ने इस विचार को पुख्ता वैज्ञानिक प्रमाण में बदल दिया।
रात में अगर आप आसमान को कुछ घंटों तक देखें, तो तारे एक दिशा में घूमते हुए दिखते हैं। असल में तारे नहीं घूम रहे बल्कि पृथ्वी घूम रही है, इसलिए हमें ऐसा लगता है। अब टेक्नोलॉजी इतनी ज्यादा बढ़ गई है, कि सैटेलाइट से साफ देखा जा सकता है कि पृथ्वी अपनी धुरी पर घूम रही है।
Léon Foucault का जन्म पेरिस में हुआ था और उनकी शुरुआती पढ़ाई घर पर ही हुई। उन्होंने पहले मेडिसिन चुना, लेकिन खून देखकर डर लगने के कारण उन्होंने फिजिक्स की ओर रुख किया - और यहीं से नया सफर शुरू किया।