क्या आप भी हिंदी बोलते हैं, और बचपन में हिंदी को विषय के तौर पर पढ़ा था, तो बताइये ऐसे कौन से अक्षर हैं, जिनसे कोई शब्द नहीं बनता है। बता दें, ऐसे अनोखे अक्षर एक दो नहीं, बल्कि 5 हैं। ज्यादातर लोग केवल 2 या 4 अक्षर तक ही अंदाजा लगा पा रहे हैं।
ये रहे वो पांच अक्षर जिनसे कोई शब्द शुरू नहीं होता है। (ञ (nya), ङ (nga), ण (na), ड़ (ra), और ढ़ (rha))
हिंदी वर्णमाला में मुख्य रूप से 52 वर्ण (अक्षर) माने जाते हैं। इसमें लेखन के आधार पर 11 स्वर, 33 व्यंजन, 4 संयुक्त व्यंजन, 2 द्विगुण व्यंजन और 2 अयोगवाह (अं, अः) शामिल हैं।
हिंदी वर्णमाला में 11 स्वर (अ, आ, इ, ई, उ, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ), 33 व्यंजन (क से ह तक), 4 संयुक्त व्यंजन (क्ष, त्र, ज्ञ, श्र), 2 द्विगुण व्यंजन (ड़, ढ़) और 2 अयोगवाह (अं - अनुस्वार, अः - विसर्ग)।
जिन वर्णों का उच्चारण स्वतंत्र रूप से (बिना किसी अन्य वर्ण की सहायता के) और निर्बाध रूप से (वायु बिना किसी रुकावट के) होता है, उन्हें स्वर कहते हैं। इनके उच्चारण में फेफड़ों से निकलने वाली वायु बिना अवरोध के मुख से बाहर आती है।
व्यंजन वे वर्ण हैं जिनका उच्चारण करने के लिए स्वरों (मुख्यतः 'अ' स्वर) की सहायता लेनी पड़ती है और जिनके उच्चारण में वायु मुख से रुककर या घर्षण के साथ बाहर निकलती है।
हिंदी वर्णमाला में ड़ और ढ़ को द्विगुण व्यंजन कहते हैं। ये 'ड' और 'ढ' के नीचे नुक्ता (.) लगाकर बनते हैं। इनमें दो (स्पर्श और उत्क्षिप्त) गुण होते हैं, इसलिए इन्हें द्विगुण कहते हैं। इनके उच्चारण में जीभ झटके से नीचे आती है।
जिन व्यंजन वर्णों का उच्चारण स्वर और व्यंजन के मध्य (बीच) में होता है, उन्हें अंतस्थ व्यंजन कहते हैं। इनका उच्चारण करते समय जीभ मुख के किसी भाग को पूरी तरह स्पर्श नहीं करती। इनकी कुल संख्या चार है: य, र, ल, व।