बैंक यह देखता है कि आपकी कमाई कितनी नियमित और भरोसेमंद है। यदि आपकी आय का स्रोत अस्थिर है या लगातार नहीं है, तो बैंक को शक हो सकता है कि आप समय पर EMI चुका पाएंगे या नहीं। सरकारी नौकरी या प्रतिष्ठित निजी कंपनियों में कार्यरत व्यक्तियों को आमतौर पर अधिक प्राथमिकता दी जाती है, जबकि फ्रीलांसर या व्यापारियों को अपनी आमदनी का ठोस प्रमाण देना पड़ता है।
आपकी मासिक आमदनी का कितना हिस्सा पहले से मौजूद कर्जों में जा रहा है, यह जानना बैंक के लिए अहम होता है। अगर आपके DTI (Debt-to-Income Ratio) में पहले से ज्यादा लोन की EMI शामिल है, तो नया लोन देने में बैंक को जोखिम लगता है। आदर्श रूप से यह रेश्यो 40% से नीचे होना चाहिए।
आप कितनी बार नौकरी बदलते हैं, किस कंपनी में कार्यरत हैं और कितना अनुभव है – यह सब बैंक के लिए महत्वपूर्ण होता है। लोन अप्रूवल के लिए एक स्थिर जॉब प्रोफाइल मददगार साबित होती है। बार-बार नौकरी बदलने वालों या नए कारोबारियों के लिए बैंक थोड़ा सतर्क रहता है।
आप लोन क्यों लेना चाहते हैं और क्या कोई गारंटी दे रहे हैं, यह भी बैंक का निर्णय प्रभावित करता है। होम लोन या कार लोन जैसे सिक्योर्ड लोन में गारंटी होती है, जिससे बैंक को सुरक्षा मिलती है। वहीं, पर्सनल लोन जैसे अनसिक्योर्ड लोन में जोखिम ज्यादा होता है, इसलिए इन्हें मंजूर करने में ज्यादा सावधानी बरती जाती है।
यदि आपके पास बैंक के साथ अच्छा संबंध है और पहले का रिकॉर्ड मजबूत रहा है (जैसे कि समय पर EMI भुगतान, कोई चेक बाउंस न होना), तो यह आपके लोन अप्रूवल में सहायक बन सकता है। पुराने सेविंग अकाउंट या सैलरी अकाउंट होने से बैंक को आपकी वित्तीय स्थिति का अंदाजा होता है, जो आपके पक्ष में जाता है।