कौन हैं श्रवण कुमार विश्वकर्मा? टेंपो चलाया, सीमेंट बेचा, अब बने एयरलाइन का मालिक

​Shankh Airline Success Story: उत्तर प्रदेश के कानपुर की तंग गलियों में पले-बढ़े श्रवण कुमार विश्वकर्मा की कहानी किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। जिस इंसान ने कभी टेंपो में सफर किया और जरूरत पड़ने पर टेंपो चलाया भी, वही आज अपनी खुद की एयरलाइन शुरू करने जा रहा है। श्रवण का सपना है कि हवाई चप्पल पहनने वाला भी हवाई जहाज में सफर कर सके। यह सपना अब सच के बहुत करीब है। श्रवण कुमार आज भी खुद को “कानपुर का लड़का” कहते हैं। गंगा, टेंपो और संघर्ष उनकी पहचान का हिस्सा हैं। उनकी कहानी सिर्फ एक एयरलाइन शुरू करने की नहीं, बल्कि हिम्मत, मेहनत और सपने देखने की ताकत की मिसाल है। अब सभी की नजरें शंख एयरलाइंस की पहली उड़ान पर टिकी हैं।​

Authored by: रामानुज सिंहUpdated Dec 30 2025, 13:20 IST
​शंख एयरलाइंस को मिली सरकारी मंजूरी​Image Credit : Istock01 / 07

​शंख एयरलाइंस को मिली सरकारी मंजूरी​

24 दिसंबर को नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने शंख एयरलाइंस को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया। इसके साथ ही अल हिंद एयर और फ्लाई एक्सप्रेस को भी मंजूरी मिली। यह शंख एयरलाइंस के लिए एक बड़ा कदम है, क्योंकि इसके बाद एयरलाइन के ऑपरेशन शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। (तस्वीर- istock/x)

​कौन हैं श्रवण कुमार विश्वकर्मा​Image Credit : Istock02 / 07

​कौन हैं श्रवण कुमार विश्वकर्मा​

उत्तर प्रदेश के कानपुर के रहने वाले श्रवण कुमार विश्वकर्मा एक मिडिल क्लास परिवार से आते हैं। पढ़ाई में ज्यादा मन न लगने और पारिवारिक हालातों के कारण उनकी पढ़ाई बीच में ही छूट गई। इसके बाद उन्होंने नौकरी की बजाय खुद का काम शुरू करने का फैसला किया। शुरुआत छोटे स्तर से हुई, लेकिन मेहनत और जोखिम लेने की हिम्मत ने उन्हें आगे बढ़ाया। (तस्वीर- istock/x)

​कारोबार से बनी पहचान​Image Credit : Istock03 / 07

​कारोबार से बनी पहचान​

रिपोर्ट्स के मुताबिक श्रवण ने पहले सरिया के बिजनेस में कदम रखा। इसके बाद सीमेंट, माइनिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर में काम किया। उन्होंने धीरे-धीरे ट्रकों का एक बड़ा नेटवर्क खड़ा किया। यहीं से उनकी पहचान एक सफल कारोबारी के रूप में बनी। श्रवण मानते हैं कि जमीन से जुड़े रहकर काम करने का अनुभव ही उनकी सबसे बड़ी ताकत है। (तस्वीर- istock/x)

​एविएशन सेक्टर में आने का विचार​Image Credit : Istock04 / 07

​एविएशन सेक्टर में आने का विचार​

करीब तीन से चार साल पहले श्रवण के मन में एविएशन सेक्टर में कुछ नया करने का विचार आया। उन्हें लगा कि आज के समय में हवाई यात्रा सिर्फ लग्ज़री नहीं, बल्कि जरूरत बन चुकी है। इसके बावजूद आम और मध्यम वर्ग के लिए सस्ती, भरोसेमंद और ईमानदार एयरलाइन की कमी है। इसी सोच ने शंख एयरलाइंस की नींव रखी। (तस्वीर- istock/x)

​नाम और सोच के पीछे की कहानी​Image Credit : Istock05 / 07

​नाम और सोच के पीछे की कहानी​

एयरलाइन का नाम ‘शंख’ रखने के पीछे भी खास सोच है। नई दुनिया की रिपोर्ट के मुताबिक श्रवण कहते हैं कि शंख हर घर में होता है और आस्था का प्रतीक है, लेकिन उसे सही तरीके से बजाना सबके बस की बात नहीं। यही बात उनकी कंपनी की सोच को भी दर्शाती है। शंख एयरलाइंस भरोसे, सादगी और अलग पहचान के साथ आगे बढ़ना चाहती है। (तस्वीर- istock/x)

​तय किराया और आम लोगों पर फोकस​Image Credit : Istock06 / 07

​तय किराया और आम लोगों पर फोकस​

शंख एयरलाइंस का सबसे बड़ा दावा है कि यहां डायनामिक प्राइसिंग नहीं होगी। यानी सुबह खरीदी गई टिकट शाम को कई गुना महंगी नहीं होगी। त्योहार हो या ज्यादा डिमांड, किराया तय और पारदर्शी रहेगा। एयरलाइन सीमित मुनाफे में भरोसेमंद सेवा देने पर ध्यान देगी, ताकि आम आदमी भी बिना डर के हवाई सफर कर सके। (तस्वीर- istock/x)

​भविष्य की उड़ान और यूपी से शुरुआत​Image Credit : Istock07 / 07

​भविष्य की उड़ान और यूपी से शुरुआत​

शुरुआत में शंख एयरलाइंस एयरबस A320 विमानों से उड़ान भरेगी। फिलहाल तीन विमान तैयार हैं। 2025 तक बेड़े को 10 से ज्यादा और 2026–27 तक 15 से 25 विमानों तक ले जाने का लक्ष्य है। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की भी प्लानिंग है। एयरलाइन का हेड ऑफिस लखनऊ में होगा और पहली उड़ान उत्तर प्रदेश से ही शुरू होगी। कानपुर, वाराणसी, गोरखपुर और प्रयागराज जैसे शहरों को देश के बड़े महानगरों से जोड़ने की तैयारी है। (तस्वीर- istock/x)

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