भारत में चांदी की कीमतें आसमान छू रही हैं दुनिया में जितनी चांदी (Silver) के भंडार यानी रिजर्व हैं, उसमें सबसे बड़ा हिस्सा पेरू (Peru) के पास है। पेरू के खदानों में लगभग 1,10,000 मीट्रिक टन चांदी के भंडार मौजूद हैं, जो वैश्विक कुल का करीब 18 % हिस्सेदार हैं। आइए आपको भारत समेत दुनिया के टॉप सिल्वर रिजर्व के बारे में बताएं।
पेरू के बाद दूसरे नंबर पर ऑस्ट्रेलिया (94,000 टन), तीसरे पर रूस (92,000 टन), चौथे पर चीन (72,000 टन) और पांचवें स्थान पर पोलैंड (61,000 टन) हैं। इसके अलावा मेक्सिको, चिली और संयुक्त राज्य अमेरिका जैसे देशों के पास भी बड़े स्तर पर चांदी के भंडार मौजूद हैं। यह सारे देश मौजूदा और भविष्य के कॉमोडिटी बाजार में चांदी के सप्लाइ के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।
वैश्विक स्तर पर चांदी के भंडार लगभग 6,40,000 से 6,50,000 मीट्रिक टन के बीच अनुमानित हैं। इन भंडारों में से पेरू जैसे शीर्ष देशों का हिस्सा सबसे बड़ा रहता है। चांदी सिर्फ आभूषणों या सिक्कों के लिए ही नहीं, बल्कि उद्योग, इलेक्ट्रॉनिक्स, सौर ऊर्जा और कई तकनीकी उपकरणों में भी इस्तेमाल होती है, इसलिए इसका भंडार मूल्यवान और महत्वपूर्ण माना जाता है।
भारत के पास सिल्वर के भंडार अपेक्षाकृत छोटे हैं। भारत का कुल सिल्वर रिजर्व लगभग 8,000 मीट्रिक टन है, जो दुनिया के कुल भंडार का केवल 1.3 % के आसपास है। इस वजह से भारत विश्व की शीर्ष 10 चांदी रिजर्व वाली सूची में शामिल नहीं है और उसे 10 वें स्थान के नीचे रखा जाता है।
भारत में चांदी सीधे खनन से कम होती है, बल्कि यह सीसा (Lead) और जस्ता (Zinc) के खनन का बाय-प्रोडक्ट होती है। राजस्थान के ज़ावर (Zawar) क्षेत्र में चांदी से समृद्ध खदानें हैं जहां से यह धातु प्रमुख रूप से प्राप्त होती है। भारत में चांदी का उत्पादन वैश्विक स्तर पर उतना बड़ा नहीं है, लेकिन घरेलू मांग के लिहाज़ से यह महत्वपूर्ण है।
चांदी का उपयोग सिर्फ आभूषणों में नहीं बल्कि फोटोग्राफी, इलेक्ट्रॉनिक्स, चिकित्सा उपकरण, सौर पैनल और औद्योगिक मशीनों में भी बड़े पैमाने पर किया जाता है। इसी वजह से चांदी की मांग वैश्विक स्तर पर बढ़ रही है और वर्तमान समय में इसकी कीमतों में भी बढ़ोतरी देखने को मिली है। निवेश के लिहाज़ से भी चांदी कई बार सोने से बेहतर प्रदर्शन कर सकती है।
भारत चांदी का बड़ा आयातक भी है और मौजूदा सालों में चांदी के आयात में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। इससे व्यापार घाटा भी बढ़ा है, क्योंकि 2025 के अक्टूबर महीने में चांदी के आयात में 500 % से ज्यादा वृद्धि दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि घरेलू मांग जल्द से जल्द पूरा करने के लिए भारत को अंतरराष्ट्रीय बाज़ार पर निर्भर रहना पड़ता है।
जहां पेरू जैसे देश दुनिया के सबसे बड़े सिल्वर रिज़र्व रखते हैं, वहीं भारत की भूमिका भले ही कम हो, लेकिन घरेलू खपत और उद्योग की जरूरतों की वजह से भारत की मांग बढ़ी है। भविष्य में चांदी के भंडार का विकास और तकनीकी उपयोगों में वृद्धि के कारण भारत की भूमिका और महत्वपूर्ण हो सकती है, खासकर इलेक्ट्रॉनिक्स और ग्रीन एनर्जी जैसे क्षेत्रों में।