अटल पेंशन योजना के तहत सब्सक्राइबर 1,000 रुपये से लेकर 5,000 रुपये तक की न्यूनतम गारंटीड मासिक पेंशन चुन सकता है। पेंशन की राशि इस बात पर निर्भर करती है कि व्यक्ति किस उम्र में योजना से जुड़ता है और उसने कितनी पेंशन चुनी है। इसी आधार पर मासिक योगदान तय होता है, जो करीब 42 रुपये से शुरू होकर 1,454 रुपये तक जा सकता है।
बीते कुछ समय से अटल पेंशन योजना से जुड़े कई लोगों के मन में यह सवाल उठ रहा है कि क्या सरकार इस योजना के तहत मिलने वाली न्यूनतम पेंशन राशि बढ़ाएगी। महंगाई बढ़ने के कारण लोगों को लग रहा था कि 1,000 से 5,000 रुपये की पेंशन भविष्य में पर्याप्त नहीं होगी। इसी वजह से इस मुद्दे को संसद में भी उठाया गया।
लोकसभा में सरकार से सवाल किया गया कि क्या असंगठित क्षेत्र के कामगारों की सामाजिक सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए अटल पेंशन योजना में पेंशन राशि बढ़ाने पर विचार किया जा रहा है। इसके साथ ही यह भी पूछा गया कि क्या योगदान संरचना में बदलाव या महंगाई से जुड़ी पेंशन व्यवस्था (इंफ्लेशन लिंक्ड पेंशन) लाने की कोई योजना है।
सरकार ने इस पर अपना रुख बिल्कुल साफ कर दिया है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने सोमवार, 15 दिसंबर को संसद में लिखित जवाब देते हुए कहा कि फिलहाल अटल पेंशन योजना में पेंशन राशि बढ़ाने की कोई योजना नहीं है। उन्होंने बताया कि पेंशन बढ़ाने से सब्सक्राइबर्स को ज्यादा योगदान देना पड़ेगा, जिससे उन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ जाएगा।
सरकार का कहना है कि इसी वजह से अटल पेंशन योजना को मौजूदा नियमों और शर्तों के साथ ही जारी रखने का फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि यह योजना कम आय वाले लोगों के लिए बनाई गई है और योगदान बढ़ने से कई लोग योजना से बाहर हो सकते हैं। इसलिए फिलहाल पेंशन राशि या योगदान संरचना में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।
सरकारी आंकड़ों के अनुसार 30 नवंबर 2025 तक अटल पेंशन योजना से कुल 8,45,17,419 लोग जुड़ चुके हैं। यानी करीब 8.4 करोड़ लोग इस योजना का लाभ ले रहे हैं। यह आंकड़ा दिखाता है कि अटल पेंशन योजना देश में सामाजिक सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ी और भरोसेमंद योजना बन चुकी है।
डेटा के मुताबिक सबसे ज्यादा सब्सक्राइबर 1,000 रुपये की पेंशन स्लैब में हैं। इस स्लैब में कुल 86.91 प्रतिशत लोग शामिल हैं, जिनकी संख्या 7.34 करोड़ से ज्यादा है। 2,000 रुपये की पेंशन स्लैब में करीब 3 प्रतिशत लोग हैं। वहीं 3,000 रुपये की पेंशन के लिए 1.41 प्रतिशत और 4,000 रुपये के लिए सिर्फ 0.53 प्रतिशत सब्सक्राइबर जुड़े हैं। सबसे ज्यादा पेंशन यानी 5,000 रुपये की स्लैब में 8.15 प्रतिशत लोग हैं, जिनकी संख्या करीब 68.7 लाख है।