इस फैसले के तहत उन देशों के नागरिकों के इमिग्रेंट वीज़ा आवेदनों को रोका जाएगा, जिन्हें अमेरिका की नजर में ज्यादा जोखिम वाला माना जा रहा है। पाकिस्तान और बांग्लादेश के अलावा अफगानिस्तान, ईरान, रूस, नाइजीरिया जैसे कई देश इस सूची में शामिल बताए जा रहे हैं। ये रोक फिलहाल स्थायी निवास से जुड़े वीज़ा पर लागू होगी।
अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह फैसला देश की आर्थिक और सामाजिक सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। सरकार का मानना है कि कुछ देशों से आने वाले लोगों पर अमेरिकी सरकारी योजनाओं और संसाधनों पर अतिरिक्त बोझ पड़ सकता है, इसलिए वीज़ा सिस्टम की सख्त समीक्षा जरूरी है।
डोनाल्ड ट्रंप ने इस फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि अमेरिका अब पूरी दुनिया की जिम्मेदारी नहीं उठा सकता। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि अमेरिका को पहले अपने नागरिकों के हितों की रक्षा करनी चाहिए और इमिग्रेशन नीति में सख्ती समय की जरूरत है।
इस रोक का सबसे ज्यादा असर उन लोगों पर पड़ेगा जिन्होंने पहले से ही वीज़ा के लिए आवेदन कर रखा है या इंटरव्यू की तैयारी कर रहे थे। कई परिवारों के मिलने की उम्मीदें अधर में लटक गई हैं, खासकर उन लोगों की जो फैमिली या जॉब बेस्ड वीज़ा के जरिए अमेरिका जाना चाहते थे।
हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल टूरिस्ट, स्टूडेंट और बिजनेस वीज़ा पर इस फैसले का सीधा असर नहीं बताया गया है। यानी पढ़ाई, घूमने या काम से जुड़े अस्थायी वीज़ा अभी जारी रह सकते हैं, लेकिन स्थायी बसने की प्रक्रिया मुश्किल हो गई है।
इस फैसले को लेकर मानवाधिकार संगठनों और इमिग्रेशन एक्सपर्ट्स ने नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि इस तरह की रोक से आम और जरूरतमंद लोगों को परेशानी होगी, जिनका अमेरिका की सुरक्षा या अर्थव्यवस्था से कोई सीधा खतरा नहीं है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि यह रोक कितने समय तक लागू रहेगी। अमेरिकी प्रशासन ने कहा है कि वीज़ा सिस्टम की समीक्षा के बाद आगे का फैसला लिया जाएगा। लेकिन ट्रंप के सख्त रुख से यह संकेत मिल रहे हैं कि आने वाले समय में अमेरिका की इमिग्रेशन नीति और ज्यादा कड़ी हो सकती है।