न्यूज एजेंसी पीटीआई-भाषा के मुताबिक मंत्रालय ने बताया कि राजस्थान में भादला-दो से सीकर-दो सब-स्टेशन तक 765 किलोवॉट की 628 सर्किट किलोमीटर लंबी नई ट्रांसमिशन लाइन चालू हो गई है। इस लाइन के शुरू होने के साथ ही देश के राष्ट्रीय ग्रिड ने 14 जनवरी को पांच लाख सर्किट किलोमीटर का आंकड़ा पार कर लिया।
नई ट्रांसमिशन लाइन के चालू होने से भादला, रामगढ़ और फतेहगढ़ सौर ऊर्जा परिसर से अतिरिक्त 1,100 मेगावाट बिजली पारेषण संभव हो गया है। इससे नवीकरणीय ऊर्जा के बड़े हिस्से को आसानी से ग्रिड में शामिल किया जा सकेगा।
बिजली मंत्रालय के अनुसार, अप्रैल 2014 से अब तक देश के ट्रांसमिशन नेटवर्क में 71.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इस दौरान 2.09 लाख सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइनें जोड़ी गईं। साथ ही, ट्रांसफॉर्मर क्षमता में 876 गीगावोल्ट एम्पियर की बढ़ोतरी हुई है। यह आंकड़ा दर्शाता है कि पिछले कई वर्षों में बिजली ट्रांसमिशन क्षेत्र में काफी तेजी आई है।
देश की अंतर-क्षेत्रीय बिजली अंतरण क्षमता अब 1,20,340 मेगावाट तक पहुंच गई है। इसका मतलब यह है कि देश के विभिन्न हिस्सों के बीच बिजली की निर्बाध आपूर्ति संभव हो गई है। इससे “एक राष्ट्र–एक ग्रिड–एक फ्रीक्वेंसी” के लक्ष्य को भी सफलतापूर्वक हासिल किया गया है।
मंत्रालय ने कहा कि कार्यान्वयन के चरण में मौजूद अंतर-राज्यीय ट्रांसमिशन परियोजनाओं से लगभग 40,000 सर्किट किलोमीटर नई ट्रांसमिशन लाइन और 399 गीगावोल्ट एम्पियर अतिरिक्त ट्रांसफॉर्मर क्षमता जुड़ने की उम्मीद है। ये परियोजनाएं 2030 तक 500 गीगावाट नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन के लक्ष्य को पूरा करने में मदद करेंगी।
नई ट्रांसमिशन लाइनों और ट्रांसफॉर्मर क्षमता के विस्तार से नवीकरणीय ऊर्जा के तेजी से ग्रिड में शामिल होने की प्रक्रिया आसान होगी। इससे गैर-जीवाश्म ऊर्जा के उत्पादन और उसके इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। यह कदम देश को ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण दोनों में मदद करेगा।
बिजली मंत्रालय ने कहा कि पांच लाख सर्किट किलोमीटर ट्रांसमिशन लाइन की उपलब्धि देशभर में विश्वसनीय, किफायती और सुरक्षित बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने में सरकार के लगातार प्रयासों को दर्शाती है। यह न केवल बिजली के बेहतर पारेषण का संकेत है बल्कि यह नवीकरणीय ऊर्जा को तेजी से अपनाने के लिए किए गए कदमों को भी दिखाता है।