बिहार चुनाव में कमजोर होता जा रहा है पंजा, मुट्ठी में नहीं आ रही हैं 30 से अधिक सीटें

पटना समाचार
श्वेता सिंह
श्वेता सिंह | सीनियर असिस्टेंट प्रोड्यूसर
Updated Oct 22, 2020 | 12:00 IST

सालों साल देश की राजनीति में अपना वर्चस्व कायम रखने वाले कांग्रेस पार्टी बिहार में एक-एक सीट के लिए मोहताज है। उसके प्रदर्शन का ग्राफ यहां गिरता जा रहा है।

bihar elections 2020
बिहार विधानसभा चुनाव 2020  |  तस्वीर साभार: PTI

मुख्य बातें

  • कांग्रेस जैसी बड़ी और कभी देश की सत्ता चलाने वाली पार्टी मात्र 70 विधान सभा सीटों से चुनाव लड़ रही है
  • 1995 के विधानसभा चुनावों में कांग्रेस ने मात्र 29 सीटें जीतीं
  • 1990 से बिहार चुनाव में लगातार कांग्रेस की हार का ग्राफ बढ़ रहा है

नई दिल्ली: कांग्रेस पार्टी का बिहार में हाल उस बल्लेबाज की तरह है, जो कड़ी मेहनत करने के बाद भी तीस रन से अधिक नहीं बना पा रहा है। सालों से कांग्रेस का बिहार में बुरा हाल है। एक राष्ट्रीय पार्टी का ये हाल होना, सच में पार्टी के भविष्य के लिए उचित नहीं। पार्टी के अध्यक्ष बदल गए, बार-बार प्रियंका गांधी की पुकार लगाने वाले पार्टी कार्यकर्ताओं को प्रियंका गांधी भी मिल गईं, लेकिन लगता है उनका भी जादू जनता पर नहीं चल पा रहा है। चुनाव से पहले ही महागठबंधन का हाल भी कुछ ठीक नहीं लग रहा है।  

1980 तक कांग्रेस का दबदबा था  

देश में इमरजेंसी के तुरंत बाद वाले चुनाव को छोड़ दें तो कांग्रेस का बिहार में दबदबा था। पार्टी का अपना रुतबा था। कांग्रेस देश और राज्यों में बेहतर का  रही थी। बिहार की जनता के बीच उसका विश्वास था। बिहार की जनता इस समय तक कांग्रेस को कभी निराश नहीं की, लेकिन अगले दस साल बाद कांग्रेस की तस्वीर ही बदल गई।  

1990 से कांग्रेस का ग्राफ नीचे गिरने लगा  

बिहार में कांग्रेस की बुरी दशा इस साल से शुरू हो गई। बिहार की जनता ने कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखाना शुरू किया। वास्तव में, 1990 के विधानसभा चुनाव को बिहार की राजनीति के लिए एक मोड़ के रूप में देखा जा सकता है। कांग्रेस की सीटों में गिरावट दिखनी शुरू हो गई थी। उसके उम्मीदवारों को बिहार की जनता ठुकराने लगी थी। इस साल के चुनाव में कांग्रेस के वोट बैंक में पचीस फीसदी की गिरावट आ चुकी थी। 

1995 के चुनाव में कांग्रेस के हाथ लगी मात्र 29 सीटें   

1995 के विधानसभा चुनावों में, जनता दल 167, भाजपा के 41 सीटों के बाद कांग्रेस ने मात्र 29 सीटें जीतीं। ये सिलसिला अगले विधान सभा चुनाव में भी जारी रहा। 2000 के विधानसभा चुनावों में, कांग्रेस का वोट प्रतिशत घटकर 11 प्रतिशत रह गया और 2005 में तो कांग्रेस के लिए डूब मरो वाली स्थिति खड़ी हुई। कांग्रेस का वोट 5 प्रतिशत रह गया। 

2020 में महज 70 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार  

कांग्रेस ने बिहार में राजद से गठबंधन करके सत्ता का सुख भोगना चाहा लेकिन कुछ सालों से वो भी संभव नहीं हो पा रहा है। इस बार के विधान सभा चुनाव में कांग्रेस जैसी बड़ी और कभी देश की सत्ता चलाने वाली पार्टी मात्र सत्तर विधान सभा सीटों से चुनाव लड़ रही है। उम्मीदवारों का ये आंकड़ा ही कांग्रेस का दर्द और दशा बयान करने के लिए काफी है।  

कांग्रेस की निकट भविष्य में राजनीति में इतनी बुरी दशा होगी शायद ही किसी कांग्रेसी ने कभी सोचा होगा। बहरहाल बिहार विधान सभा चुनाव में कांग्रेस की जीत का ग्राफ बढ़ेगा या पांच प्रतिशत से भी कम हो जाएगा, ये आने वाला वक्त ही बताएगा।  

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