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G-RAMG कानून के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा, देश भर में चलाएगी 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि नया कानून मनरेगा को ख़त्म करने की साज़िश है। बाढ़ और कोविड के दौरान मनरेगा देश की सबसे मज़बूत सुरक्षा योजना रही, जिससे महिलाओं, दलितों और आदिवासियों को सबसे अधिक लाभ मिला। नए कानून में रोज़गार अब अधिकार नहीं रहा, मज़दूरी 100% से घटाकर 60% कर दी गई है और सत्ता का केंद्रीकरण दिल्ली में किया जा रहा है।कांग्रेस की मांग है कि G-RAMG कानून तुरंत वापस लिया जाए, पंचायती राज व्यवस्था को कमज़ोर न किया जाए और गरीब मज़दूरों का अधिकार सुरक्षित रखा जाए।

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G-RAMG कानून के खिलाफ कांग्रेस ने खोला मोर्चा, देश भर में चलाएगी 'मनरेगा बचाओ संग्राम' अभियान

27 दिसंबर को कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में यह संकल्प लिया गया कि मनरेगा को कमज़ोर और ख़त्म करने की मंशा से लाए गए सरकार के नए क़ानून के ख़िलाफ़ कांग्रेस पूरे देश में आंदोलन करेगी। इसी संकल्प के तहत कांग्रेस ने एक व्यापक देशव्यापी अभियान की घोषणा की है, जिसका नाम है — “मनरेगा बचाओ संग्राम”।

मनरेगा बचाओ संग्राम का उद्देश्य

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि नए क़ानून पर गंभीर विचार-विमर्श के बाद कांग्रेस इस नतीजे पर पहुंची है कि इसकी पूरी संरचना मनरेगा को ख़त्म करने के लिए बनाई गई है। मनरेगा केवल एक योजना नहीं, बल्कि ग़रीबी उन्मूलन और सामाजिक सुरक्षा का सबसे मज़बूत आधार रहा है। बाढ़, कोविड जैसी आपदाओं के समय मनरेगा देश के करोड़ों लोगों के लिए सबसे बड़ा सुरक्षा कवच साबित हुआ। महिलाओं, दलितों और आदिवासियों को इससे सबसे अधिक लाभ मिला। लेकिन नए क़ानून के तहत रोज़गार अब अधिकार नहीं रह गया है, जो संविधान की मूल भावना के ख़िलाफ़ है।

केंद्रीकरण बनाम ग्राम स्वराज

कांग्रेस का आरोप है कि नए G-RAMG कानून के ज़रिए सभी फ़ैसले दिल्ली से थोपे जा रहे हैं, जिससे गाँवों को भारी नुकसान होगा। VB-GRAMG मॉडल के माध्यम से सत्ता का केंद्रीकरण किया जा रहा है और सरकार को क़ानूनी रूप से काम देने से इनकार करने का रास्ता मिल जाएगा। पहले जहाँ मज़दूरी का भुगतान 100 प्रतिशत होता था, अब उसे घटाकर 60 प्रतिशत कर दिया गया है, जो मज़दूरों के साथ सीधा अन्याय है।

कांग्रेस की प्रमुख मांगें

•सरकार G-RAMG कानून को तुरंत वापस ले

•मनरेगा में रोज़गार को फिर से कानूनी अधिकार बनाया जाए

•मज़दूरों की मज़दूरी में 60:40 का अनुपात ख़त्म किया जाए

•पंचायती राज संस्थाओं को कमज़ोर करने की साज़िश रोकी जाए

•तकनीक के नाम पर गरीबों को योजना से बाहर करने की प्रक्रिया बंद हो

•महात्मा गांधी के नाम को हटाने की कोशिश की कड़ी निंदा

केसी वेणुगोपाल ने कहा कि मनरेगा बचाओ संग्राम का मकसद गरीब मज़दूरों के हितों की रक्षा करना है। इससे महिलाओं, दलितों और आदिवासियों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि मनरेगा के नए क़ानून से केंद्रीकरण बढ़ा है। कांग्रेस पंचायत व्यवस्था को मज़बूत रखने के लिए संघर्ष करेगी।

देशव्यापी आंदोलन का कार्यक्रम

मनरेगा बचाओ संग्राम 10 जनवरी से 25 फ़रवरी 2026 तक

•ज़िला, पंचायत और विधानसभा स्तर पर कार्यक्रम

•धरना, चौपाल, नुक्कड़ सभा और शांतिपूर्ण प्रदर्शन

•शहीद दिवस पर वार्ड स्तर पर सत्याग्रह

•ज़िला व राज्य स्तर पर धरना और विधानसभा घेराव

•देशभर में ज़ोनल रैलियाँ

संग्राम के दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी का पत्र ग्राम प्रधानों, पूर्व ग्राम प्रधानों, ग्राम सेवकों और मनरेगा मज़दूरों को सौंपा जाएगा।

Ranjeeta Jha
रंजीता झाauthor

13 साल के राजनीतिक पत्रकारिता के अनुभव में मैंने राज्य की राजधानियों से लेकर देश की राजधानी तक सियासी हलचल को करीब से देखा है। प्लांट की गई बातें ख़बरें नहीं होती बल्कि बातों के पीछे छुपी सच्चाई असली ख़बर होती है। खबरें वही जो आपके सरोकार की हो वो आपतक लेकर आऊंगी।

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