UP: प्रयागराज और महोबा के निलंबित पुलिस अधिकारियों की प्रॉपर्टी की होगी जांच

भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त योगी उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने प्रयागराज और महोबा के निलंबित पुलिस अधिकारियों की संपत्तियों की जांच के आदेश जारी किए हैं।

Properties of suspended police officers of Prayagraj and Mahoba in UP invesigate by Vigilance
सीएम योगी ने यह भी निर्देश दिये हैं कि इन अफसरों द्वारा की गयी अनियमितताओं में शामिल पुलिसकर्मियों की अलग से जांच कर उन्हें जल्द दण्डित कराया जाए 

मुख्य बातें

  • प्रयागराज और महोबा के निलम्बित पुलिस कप्तानों की सम्पत्तियों की सतर्कता अधिष्ठान से जांच कराने के निर्देश
  • तीन पुलिस अधिकारियों पर बृहस्पतिवार को मामला भी दर्ज किया गया
  • अनियमितताओं में शामिल पुलिसकर्मियों की अलग से जांच कर उन्हें जल्द दण्डित कराए जाने के निर्देश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के मुख्यमत्री योगी आदित्यनाथ ने प्रशासनिक अनियमितता एवं भ्रष्टाचार के मामलों में और अधिक कड़ा रूख अपनाते हुये प्रयागराज और महोबा के निलम्बित पुलिस कप्तानों की सम्पत्तियों की सतर्कता अधिष्ठान से जांच कराने के निर्देश दिये हैं। महोबा के निलम्बित पुलिस अधीक्षक समेत तीन पुलिस अधिकारियों पर बृहस्पतिवार को मामला भी दर्ज किया गया।

गृह विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि मुख्यमंत्री ने प्रशासनिक गड़बड़ियों और भ्रष्टाचार के मामलों निलम्बित किये गये प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित और महोबा के पुलिस अधीक्षक मणि लाल पाटीदार की सम्पत्तियों की सतर्कता अधिष्ठान से जांच कराने के निर्देश दिये हैं।

उन्होंने बताया कि योगी ने यह भी निर्देश दिये हैं कि इन अफसरों द्वारा की गयी अनियमितताओं में शामिल पुलिसकर्मियों की अलग से जांच कर उन्हें जल्द दण्डित कराया जाए। प्रवक्ता ने बताया कि योगी के इन निर्देशों के क्रम में पाटीदार के साथ-साथ चरखारी थाने के तत्कालीन पुलिस निरीक्षक राकेश कुमार सरोज तथा खरेला के तत्कालीन थानाध्यक्ष राजू सिंह के खिलाफ महोबा शहर कोतवाली में भारतीय दण्ड विधान और भ्रष्टाचार निवारण अधियिम की सुसंगत धाराओं में मामला दर्ज कर लिया गया है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को प्रयागराज के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अभिषेक दीक्षित तथा बुधवार को महोबा के पुलिस अधीक्षक मणि लाल पाटीदार को भ्रष्टाचार के गम्भीर आरोपों में निलम्बित किया था। UP में पिछले 3.5 वर्षों में भ्रष्टाचार में लिप्त 325 अफसरों-कर्मचारियों को रिटायर किया जा चुका है! 450 कर्मचारियों पर नि‍लंबन और डिमोशन की कार्रवाई हुई है।

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