एयरपोर्ट तलाक: क्या है कपल्स के बीच का ये नया फंडा (Pic: Canva)
अपने पार्टनर के साथ यात्रा पर निकलना हमेशा रोमांचक लगता है—धूप, खुली हवा और नए सपनों की शुरुआत का एहसास। हाथ में हाथ डालकर एयरपोर्ट से गुजरना कभी-कभी किसी फिल्म के सीन जैसा लगता है। लेकिन सच यह भी है कि एयरपोर्ट में सबसे खुशहाल कपल्स भी कभी-कभी छोटी-छोटी बातों पर झगड़ालू जोड़ी बन जाते हैं। क्या खाना है, कब निकलना है, किस टर्मिनल में बेहतर कॉफी मिलेगी—ऐसे मामूली फैसले अचानक बहुत बड़े लगने लगते हैं।
यहीं से शुरू होता है 'एयरपोर्ट तलाक' का ट्रेंड।
चिंता मत कीजिए—यह नाम जितना नाटकीय है, उतना मामला नहीं है। इसमें न कोई असली ब्रेकअप होता है और न ही कोई ड्रामा। बल्कि यह ट्रेंड रिश्ते को बचाने की समझदारी भरी रणनीति है।
ब्रिटिश ट्रैवल कॉलमनिस्ट ह्यू ओलिवर ने यह शब्द गढ़ा है और इसके लिए उन्होंने अपने अनुभवों को भी इसमें उड़ेला है। देखते ही देखते इंटरनेट की दुनिया में यह शब्द वायरल हो गया क्योंकि हर कपल इस टर्म से खुद को जुड़ा हुआ पाता है।
बहुत सरल: सुरक्षा जांच के बाद, आप थोड़ी देर के लिए अपने-अपने रास्ते चले जाते हैं। अगर आप ड्यूटी-फ्री में हर परफ्यूम और हर डिस्प्ले को देखना चाहते हैं, तो जाइए! अगर आपका साथी किसी शांत कोने में कॉफी लेकर पॉडकास्ट सुनना पसंद करता है, तो वह भी ठीक है।
निर्धारित समय पर आप गेट पर मिल जाते हैं—थोड़ा सा तरोताजा होकर, बिना किसी बहस के।
ओलिवर और उनकी मंगेतर ने यही तरीका अपनाया। दोनों की एयरपोर्ट आदतें बिलकुल अलग थीं - उन्हें घूमना और खरीदारी पसंद, जबकि उन्हें शांति चाहिए। नतीजा: उड़ान से पहले ही छोटी-छोटी बहसें। लेकिन जब उन्होंने थोड़ी देर अलग-अलग घूमने का फैसला किया, तो माहौल अचानक हल्का और आसान लगने लगा।
हकीकत यह है कि एयरपोर्ट अपने-आप में तनावपूर्ण जगह हैं - लंबी लाइन, भारी बैग, उड़ान छूटने का डर और अलग-अलग यात्रा स्टाइल्स। कोई घंटों पहले पहुंचना चाहता है, कोई ठीक समय पर। कोई हर दुकान देखना चाहता है, कोई सीधे गेट पर बैठना। ये अंतर सामान्य दिनों में शायद मायने न रखें, लेकिन एयरपोर्ट पर तनाव जरूर बढ़ा देते हैं।
यहीं एयरपोर्ट तलाक राहत देता है। इसके चलते आपको थोड़ा स्पेस मिलता है और थोड़ा 'मी-टाइम' निकल आता है। आपस की बहस से जो मूड खराब होता है - उससे भी आप बच ही जाते हैं। और फिर एंट्री के समय मुस्कुराते हुए दोबारा साथ होते हैं शानदार टाइम साथ में बिताने के लिए। यह रिश्ते को खत्म करने का नहीं, बल्कि बेहतर समझ का तरीका है।
आखिरकार, हर चीज साथ-साथ करना ही टीमवर्क नहीं होता। कभी-कभी छुट्टी शुरू होने से पहले लिया गया छोटा सा ब्रेक पूरी यात्रा को अधिक सुखद बना देता है।
तो अगली बार टर्मिनल में बहस की आहट महसूस हो, तो इस ट्रेंड को एक मौका दें। आप शॉपिंग कर लें, साथी को आराम करने दें, और बोर्डिंग से पहले वापस एक साथ खुशी-खुशी मिलें और अगर साथी को दिलचस्पी हो तो अपने अनुभव शेयर कर लें। तो सही है ना कि एयरपोर्ट पर कभी-कभी लिया गया यह छोटा-सा 'ब्रेक' आसमान में पहुंचने के बाद आपको और करीब ला देता है।
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