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आज का सुविचार: जीवन में खुद की ताकत आजमाने का हौसला देता है पंकज त्रिपाठी का यह विचार

आज का सुविचार (Thought of the Day): पंकज त्रिपाठी का यह विचार हार न मानने की प्रेरणा है। वह कहते हैं कि जिंदगी की नदी में तूफान का आना लाजमी है। पुल मिल जाए तो अच्छा, नहीं मिले तो डरने की बजाय तैराक बन जाओ।

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आज का सुविचार

Motivational Thought of the Day: जीवन के सफर में उतार-चढ़ाव, असफलताएं और चुनौतियां आम हैं। ऐसे में मोटिवेशन वह ईंधन है जो हमें आगे बढ़ने की ताकत देता है। बिना मोटिवेशन के सपने अधूरे रह जाते हैं, मेहनत रुक जाती है और मन हताश हो जाता है। किसी की कोई छोटी सी बात हमारे अंदर के आत्मविश्वास को जगा देती है और मुश्किलों में भी हिम्मत बनाए रखती है। बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता पंकज त्रिपाठी ने अपने काम और मेहनत से हर किसी को प्रभावित किया है। उनकी कई बातें युवाओं के लिए प्रेरणा का काम करती हैं। आज के विचीर में पढ़ते हैं पंकज त्रिपाटी का एक बेहद शानदार कोट:

"जिंदगी एक नदी है, अगर पुल ना हो तो तैरना सीख लो।"

पंकज त्रिपाठी का यह विचार जीवन की कड़वी सच्चाई को बहुत सरल और प्रभावी तरीके से बयां करता है। जिंदगी को नदी से तुलना करना कोई नया नहीं, लेकिन “अगर पुल ना हो तो तैरना सीख लो” इसमें नया जोश और व्यावहारिकता भर देता है। इसका मतलब है – जीवन में मुश्किलें आएंगी ही, रास्ते हमेशा आसान नहीं मिलेंगे। कई बार वह “पुल” जो हमें पार ले जाता, टूट जाता है या मिलता ही नहीं। तब हताश होकर किनारे बैठने की बजाय खुद को इतना मजबूत बनाओ कि नदी के तेज बहाव में भी तैर सको।

पंकज त्रिपाठी खुद इस संदेश के जीते-जागते उदाहरण हैं। बिहार के एक छोटे से गांव से आए, एनएसडी में पढ़ाई की, मुंबई में सालों तक संघर्ष किया। छोटे-मोटे रोल किए, किराया देने के लिए होटल में बर्तन तक धोए, लेकिन कभी हार नहीं मानी। जब “पुल” नहीं मिला, यानी बड़ा ब्रेक, स्टारडम या सफलता, तब उन्होंने “तैरना” सीखा। धैर्य, मेहनत और अपने हुनर पर भरोसा रखा। आज वह सफल सुपरस्टार हैं।

पंकज त्रिपाठी का यह कोट हमें आत्मनिर्भरता का सबक देता है। आज के दौर में जहां जॉब लॉस, ब्रेकअप, आर्थिक संकट या मानसिक तनाव आम हैं, लोग अकसर दूसरों पर निर्भर होकर निराश हो जाते हैं। पंकज कहते हैं कि दूसरों का इंतजार मत करो, खुद की क्षमता बढ़ाओ। मुश्किलें आएंगी, लेकिन उन्हें पार करने का हुनर खुद विकसित करो। तैरना सीखने का मतलब है स्किल्स सीखना, धैर्य रखना, असफलता से सीखना और आगे बढ़ते रहना।

अंत में, यह विचार हार न मानने की प्रेरणा है। जिंदगी की नदी में तूफान का आना लाजमी है। पुल मिल जाए तो अच्छा, नहीं मिले तो डरने की बजाय तैराक बन जाओ। पंकज त्रिपाठी का यह संदेश बताता है कि असली जीत वही है जो खुद की ताकत से हासिल की जाए।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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