कुकिंग और क्लीनिंग महिलाओं का काम नहीं, ये बेसिक एडल्टिंग है- हाल ही में अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा का यह बयान सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा। उन्होंने साफ कहा कि खाना बनाना, सफाई करना और घर के छोटे-बड़े काम किसी एक जेंडर की जिम्मेदारी नहीं, जीवन के जरूरी स्किल्स हैं। प्रियंका के बयान पर सोशल मीडिया में ये बहस छिड़ गई कि क्या ये बात वाकई सही है? वैसे एक्सपर्ट्स और बदलते समाज को देखें तो जवाब काफी हद तक हां में दिखाई देता है।
टीमवर्क है घर चलाना
पारंपरिक भारतीय समाज में लंबे समय तक खाना बनाना, बर्तन धोना और घर संभालना महिलाओं की जिम्मेदारी माना जाता रहा है। आज परिस्थितियां बदल रही हैं। महिलाएं भी पुरुषों की तरह पढ़ाई, नौकरी और बिजनेस में बराबरी से हिस्सा ले रही हैं। ऐसे में घरेलू कामों को केवल महिलाओं की जिम्मेदारी मानना न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत। एक्सपर्ट्स भी मानते हैं कि घर चलाना साझी जिम्मेदारी है।
खाना बनाना सर्वाइवल स्किल क्यों है?
फर्ज कीजिए कि कोई घर से दूर किसी दूसरे शहर में नौकरी करने चला जाए और उसे चाय तक बनानी न आती हो। ऐसे में वह पूरी तरह दूसरों पर निर्भर हो जाएगा। ठीक इसी तरह कपड़े धोना, घर साफ रखना,काम भर का खाना बनाना और बर्तन साफ करना आत्मनिर्भरता की बुनियादी शर्तें हैं। ये स्किल्स किसी भी इंसान को स्वतंत्र जीवन जीने में सक्षम बनाते हैं। इन्हें जेंडर के बजाय लाइफ स्किल के रूप में देखना ज्यादा तार्किक है।
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बच्चे वही सीखते हैं, जो घर में देखते हैं
मनोवैज्ञानिकों का कहना है कि बच्चे उपदेशों से ज्यादा व्यवहार से सीखते हैं। अगर घर में वे देखते हैं कि केवल मां ही रसोई और सफाई की जिम्मेदारी संभाल रही हैं, तो उनके मन में यही धारणा बन जाती है कि ये काम सिर्फ महिलाओं के लिए हैं। इसके उलट यदि बच्चे पिता और मां दोनों को घर के कामों में भागीदारी करते देखते हैं, तो उनके भीतर समानता, सहयोग और सम्मान की भावना विकसित होती है।
बराबरी का असली मतलब है साझेदारी
विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि हर घर में कामों का बंटवारा बिल्कुल बराबर होना जरूरी नहीं। किसी परिवार में कोई इंसान खाना बनाना पसंद करता है, तो दूसरा बाजार के काम या फाइनेंस की जिम्मेदारियां संभाल सकता है। जरूरी बात ये है कि जिम्मेदारियों का बंटवारा सहमति, सम्मान और सहयोग की भावना से हो, न कि पुराने जेंडर स्टीरियोटाइप के आधार पर।
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प्रियंका की बात क्यों मायने रखती है?
आज के माहौल में प्रियंका चोपड़ा का बयान उस सोच को चुनौती देता है, जिसने सदियों तक घरेलू कामों को महिलाओं का काम माना जाता रहा है। प्रियंका ने उस बदलाव का जिक्र कर दिया है, जिसकी आधुनिक परिवारों को सबसे ज्यादा जरूरत है।
