इंसान चाहे जितना आधुनिकता की ओर बढ़ जाए, लेकिन अपनी जड़ों को नहीं भूलता। दिलजीत दोसांझ भी ऐसे ही इंसान हैं। दुनिया भर में घूम-घूमकर लोगों का मनोरंजन करने वाले दिलजीत हमेशा अपने साथ गुटका साहिब जरूर रखते हैं। ऐसा कभी नहीं होता कि वो अपने साथ ये धार्मिक किताब ले जाना भूल जाएं।
दिलजीत दोसांझ ने हाल ही में खुद ये बात बताई है कि जब वह घर से बाहर होते हैं तो उनके पास गुटका साहिब जरूर होते हैं। बहुत से लोग तो जानते हैं कि गुटका साहिब क्या है, तेकिन बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जिन्हें नहीं पता कि सिख परंपरा में इसका इतना महत्व क्यों है। ऐसे लोगों की हम मदद कर रहे हैं।
क्या है गुटका साहिब
गुटका साहिब सिख धर्म की एक छोटी प्रार्थना पुस्तिका है। इसमें गुरु ग्रंथ साहिब समेत तमाम सिख ग्रंथों की चुनिंदा वाणियों का संकलन होता है। गुटका साहिब का आकार छोटा होता है, ताकि लोग इसे अपने साथ आसानी से रख सकें।
गुटका साहिब में आमतौर पर जापजी साहिब, जाप साहिब, तव-प्रसाद सवैये, रेहरास साहिब, कीर्तन सोहिला और सुखमनी साहिब के अंश शामिल होते हैं। हालांकि अलग-अलग प्रकाशनों में इसकी सामग्री में थोड़ा अंतर भी देखने को मिलता है।
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सिख धर्म में क्या है गुटका साहिब का महत्व
सिख परंपरा में प्रार्थना धार्मिक अनुष्ठान से बढ़कर जीवन को अनुशासित, संतुलित और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध बनाने का माध्यम है। सुबह, शाम और रात में की जाने वाली प्रार्थनाओं के लिए गुटका साहिब एक सुविधाजनक संकलन के रूप में काम करता है। इसकी छोटी और पोर्टेबल बनावट इसे यात्रा के दौरान भी साथ रखने योग्य बनाती है।
सिख समुदाय में गुटका साहिब को बेहद सम्मान के साथ रखा जाता है। श्रद्धालु इसे साफ स्थान पर रखते हैं, सम्मानपूर्वक उठाते हैं और पाठ के दौरान पूरी श्रद्धा बनाए रखते हैं।
गुटका सहाबि सिख परंपरा की उस जीवन दृष्टि का प्रतिनिधित्व करता है, जो ईश्वर के स्मरण, अनुशासन, विनम्रता और सेवा के भाव को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की प्रेरणा देती है। शायद यही वजह है कि दुनिया भर में लाखों सिख श्रद्धालुओं की तरह दिलजीत दोसांझ भी इसे अपने जीवन का अभिन्न हिस्सा मानते हैं और जहां भी जाते हैं, इसे अपने साथ रखना नहीं भूलते।
दिलजीत दोसांझ का गुटका साहिब को हमेशा अपने साथ रखने को उनके आध्यात्मिक जुड़ाव का प्रतीक माना जा सकता है। एक ऐसे दौर में, जब व्यस्त जीवन और लगातार यात्राएं लोगों को अपनी जड़ों से दूर कर देती हैं, गुटका साहिब उनके लिए अपनी आस्था, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों से जुड़े रहने का माध्यम बन जाता है।
