Parenting Tips: बहुत से पेरेंट्स की ये शिकायत रहती है कि उनका बच्चा बहुत जिद्दी होता जा रहा है। वह जिस चीज की जिद पकड़ कर बैठ जाए तो वह उसे मनवा कर ही दम लेता है। एक्सपर्ट्स भी कहते हैं कि कुछ बच्चों में ना सुनने की बिल्कुल भी सहनशक्ति नहीं होती। हालांकि ये कोई ऐसी समस्या नहीं है जिसका कोई समाधान ना हो। ऐसे बच्चों के माता-पिता अपनी पेरेंटिंग शैली में थोड़ा बदलाव लाकर इस समस्या से पार पा सकते हैं। यहां हम कुछ तरीके बता रहे हैं जिसे अपना कर आप बच्चों में ना सुनने की क्षमता का विकास कर सकते हैं:
1. तुरंत पूरी ना करें डिमांड
बच्चे के रोने या जिद करने पर अगर आप तुरंत उसकी मांग पूरी कर देते हैं तो यह आदत तुरंत छोड़ दें। क्योंकि आपका ऐसा करना उसकी सहनशीलता को कम करता है और ना सुनने की आदत नहीं डेवलप हो पाती है।
2. ‘ना’ कहने में रहें बिंदास
बच्चे को किसी बात के लिए मना करने पर अगर आप खुद को दोषी महसूस करते हैं तो यह आदत भी छोड़ दें। यही आपरे पेरेंटिंग की परीक्षा है। बच्चे का यह समझाना जरूरी है कि हर बात ‘हां’ नहीं हो सकती।
3. हर बार ना दें लॉजिक
हर बार बच्चों को ना कहने के पीछे को लॉजिक उन्हें समझाने की जरूरत नहीं होती। इससे बच्चा कुतर्क करना सीखता है और परेशानी और बढ़ सकती है। कई बार सीधा और सख्त ‘No’ भी पर्याप्त होता है।
4. दिल से नहीं दिमाग से सोचें
बच्चा रोकर या गुस्सा होकर अपनी जिद आपके सामने रखता है तो आपको पिघलना नहीं है। उसके व्यवहार को सुधारें। उसे एहसास कराएं कि इन सब हरकतों से आपको कोई फर्क नहीं पड़ता।
5. बदलें बॉन्डिंग बढ़ाने का तरीका
बहुत से पेरेंट्स बच्चे से इमोशनल बॉन्डिंग को जाहिर करने के लिए उन्हें गिफ्ट्स देते हैं। ऐसा ना करें। उसके साथ समय बिताएं और बातें करें। तभी वह ‘ना’ को बेहतर ढंग से समझना और स्वीकारना सीख पाएगा।
पेरेंट्स अपनी पेरेंटिंग में ये कुछ आसान बदलाव कर बच्चों के बिहेवियर में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। इन तरीकों से बच्चा ना सुनना सीखेगा और अपने जिद करने की आदत को भी धीरे-धीरे छोड़ देगा।
