Aaj ki Shayari: प्रेम को दो परतों में बांट कर रख देगा नूह नारवी का यह शेर, पढ़ें नूह नारवी की शायरी हिंदी में
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Feb 19, 2026, 10:46 AM IST
Aaj ki Shayari (आज की शायरी), Nooh Narwi Shayari: आज की शायरी में नजर करते हैं नूह नारवी का एक मशहूर शेर पर। नूह नारवी का योगदान उर्दू अदब में एक ऐसी आवाज के रूप में याद किया जाता है, जिसने कम शब्दों में गहरी बात कहने की कला को नया आयाम दिया।
आज की शायरी में पढ़ें नूह नारवी का मशहूर शेर
Aaj ki Shayari (आज की शायरी), Nooh Narwi Shayari: नूह नारवी उर्दू शायरी के उन संवेदनशील और असरदार शायरों में गिने जाते हैं, जिनकी गजलों में सादगी और गहराई साथ-साथ चलती है। उनका असली नाम नूरुल हसन था और वे उत्तर प्रदेश के अमरोहा (नारवा) क्षेत्र से जुड़े थे, इसी कारण उन्हें नारवी कहा गया। नूह नारवी की शायरी में इश्क, दर्द, तन्हाई और जिंदगी के छोटे-छोटे एहसास बड़ी खूबसूरती से व्यक्त होते हैं। उनकी भाषा सरल लेकिन असरदार है, जो सीधे दिल तक पहुंचती है। आज की शायरी में पढ़ते हैं नूह नारवी का मशहूर शेर:
"दिल के दो हिस्से जो कर डाले थे हुस्न-ओ-इश्क़ ने, एक सहरा बन गया और एक गुलशन हो गया"
क्या है नूह नारवी के इस शेर का मतलब
इस शेर में हुस्न यानी सुंदरता और इश्क यानी प्रेम, दोनों मिलकर दिल को दो हिस्सों में बांट देते हैं। शायर कहते हैं कि जब प्रेम और सौंदर्य की ताकत दिल पर असर डालती है, तो इंसान के भीतर दो बिल्कुल अलग दुनिया बस जाती हैं। एक हिस्सा सहरा यानी रेगिस्तान बन जाता है। सूखा, वीरान, तन्हा और दर्द से भरा हुआ। यह वह पक्ष है जहां जुदाई, इंतजार और अधूरी चाहत का अहसास रहता है।
दूसरा हिस्सा गुलशन यानी बाग बन जाता है। हरा-भरा, खुशबूदार और जीवन से भरपूर। यह वह अवस्था है जहां मिलन, उम्मीद और खुशी के फूल खिलते हैं। यह शेर कहता है कि प्रेम केवल सुख नहीं देता, वह दर्द भी देता है। इश्क इंसान को संवेदनशील बनाता है। कभी वही दिल खिल उठता है, तो कभी सूख जाता है।
असल में यह शेर बताता है कि प्रेम विरोधाभासों का संगम है। उसमें खुशी और पीड़ा साथ-साथ रहती हैं। यही द्वंद्व दिल को कभी सहरा और कभी गुलशन बना देता है और यही इश्क की असली खूबसूरती है।
नूह नारवी के 10 मशहूर शेर
1. अदा आई जफ़ा आई ग़ुरूर आया हिजाब आया
हज़ारों आफ़तें ले कर हसीनों पर शबाब आया
2. हम इंतिज़ार करें हम को इतनी ताब नहीं
पिला दो तुम हमें पानी अगर शराब नहीं
3. सुनते रहे हैं आप के औसाफ़ सब से हम
मिलने का आप से कभी मौक़ा नहीं मिला
4. मिलना जो न हो तुम को तो कह दो न मिलेंगे
ये क्या कभी परसों है कभी कल है कभी आज
5. ख़ुदा के डर से हम तुम को ख़ुदा तो कह नहीं सकते
मगर लुत्फ़-ए-ख़ुदा क़हर-ए-ख़ुदा शान-ए-ख़ुदा तुम हो
6. महफ़िल में तेरी आ के यूँ बे-आबरू हुए
पहले थे आप आप से तुम तुम से तू हुए
7. इश्क़ में कुछ नज़र नहीं आया
जिस तरफ़ देखिए अँधेरा है
8. दोस्ती को बुरा समझते हैं
क्या समझ है वो क्या समझते हैं
9. कहीं न उन की नज़र से नज़र किसी की लड़े
वो इस लिहाज़ से आँखें झुकाए बैठे हैं
10. वो ख़ुदाई कर रहे थे जब ख़ुदा होने से क़ब्ल
तो ख़ुदा जाने करेंगे क्या ख़ुदा होने के बा'द
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