Ibadat Shayari: माह-ए-रमजान में दिल जीत लेगी इबादत शायरी, यहां देखें इबादत पर 20 मशहूर शेर
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Feb 18, 2026, 11:30 AM IST
Ibadat Shayari (इबादत शायरी): रमजान 2026 (Ramdan 2026) आ गई है। यह पाक महीना इबादत का है। जब इंसान इबादत करता है, वह अपने भीतर झांकता है। उसे अपनी कमजोरियां दिखती हैं और बेहतर बनने की चाह जागती है। इसी इबादत पर कई शायरों ने बड़े खूबसूरत शेर लिखे हैं।
Ramadan 2026: इबादत पर शायरी (Photo: iStock)
Ibadat Shayari in Hindi: रमजान का पाक महीना शुरू हो रहा है। यह महीना रोजा रखने और अल्लाह की इबादत का महीना है। इबादत के मायने बहुत गहरे हैं। यह इंसान और उसके भीतर बसे सत्य के बीच का एक शांत संवाद है। जब दिल सच्चाई से झुकता है, वही पल इबादत बन जाता है। इबादत मस्जिद, मंदिर या गिरजाघर की दीवारों तक सीमित नहीं, यह हर उस जगह होती है जहां इंसान का मन विनम्र हो जाता है और अहंकार पिघलने लगता है।
सच्ची इबादत शब्दों से कम और एहसास से ज्यादा होती है। किसी भूखे को खाना खिलाना, दुखी को दिलासा देना, किसी की गलती माफ कर देना, ये सब भी इबादत के ही रूप हैं। जब इंसान इबादत करता है, वह अपने भीतर झांकता है। उसे अपनी कमजोरियां दिखती हैं और बेहतर बनने की चाह जागती है। इसी इबादत पर कई शायरों ने बड़े खूबसूरत शेर लिखे हैं। आइए माह-ए-रमजान में पढ़ें इबादत पर शायरी:
1. नमाज़ इक भी हरगिज़ न उस ने क़ज़ा की
शब ओ रोज़ करता इबादत ख़ुदा की
-राजा मेहदी अली ख़ां
2. तिरे लिए तो झुकाना भी सर इबादत है
अगर झुका न सके दिल तो बंदगी क्या है
- असग़र वेलोरी
3. न मय-कशी न इबादत हमारी आदत है
कि सामने कोई काम आ गया तो कर लेना
-नातिक़ गुलावठी
4. कोई ख़ुदा हो कि पत्थर जिसे भी हम चाहें
तमाम उम्र उसी की इबादतें करनी
-अहमद फ़राज़
5. मोहब्बत मेरी क्या इबादत नहीं है
वो इक नूर है जिसकी सूरत नहीं है
- आलोक यादव
6. जन्नत के लिए शैख़ जो करता है इबादत
की ग़ौर जो ख़ातिर में तो मज़दूर की सूझी
- नज़ीर अकबराबादी
7. मोहब्बत और इबादत में फ़र्क़ तो है नां
सो छीन ली है तिरी दोस्ती मोहब्बत ने
-इफ़्तिख़ार मुग़ल
8. जिसे पूजा था हमने वो तो ख़ुदा ना हो सका
हम ही इबादत करते-करते फ़कीर हो गये
9. दुनिया कहे कुछ है मगर ईमान की ये बात
होने की तरह हो तो इबादत है मोहब्बत
-मंज़र लखनवी
10. आशिक़ी से मिलेगा ऐ ज़ाहिद
बंदगी से ख़ुदा नहीं मिलता
-दाग़ देहलवी
11. आता है जो तूफ़ां आने दे कश्ती का ख़ुदा ख़ुद हाफ़िज़ है
मुमकिन है कि उठती लहरों में बहता हुआ साहिल आ जाए
-बहज़ाद लखनवी
12. ऐ ख़ुदा मेरी रगों में दौड़ जा
शाख़-ए-दिल पर इक हरी पत्ती निकाल
- फ़रहत एहसास
13. तुमसे नहीं तेरे अंदर बैठे खुदा से मोहब्बत है मुझे..
तू तो बस एक ज़रिया है मेरी इबादत का…
14. यही है इबादत यही दीन ओ ईमां
कि काम आए दुनिया में इंसां के इंसां
- अल्ताफ़ हुसैन हाली
15. क़ुबूल इस बारगह में इल्तिजा कोई नहीं होती
इलाही या मुझी को इल्तिजा करना नहीं आता
- चराग़ हसन हसरत
16. उसे पाक नज़रों से चूमना भी इबादतों में शुमार है
कोई फूल लाख क़रीब हो कभी मैं ने उस को छुआ नहीं
-बशीर बद्र
17. बे-ज़रूरत भी कर लिया सज्दा
ये इबादत बड़ी इबादत है
18. तू गया नमाज़ों में मैं गया जवाज़ों में
वो तेरी इबादत थी ये मेरी इबादत है
- नाज़िम नक़वी
19. मोहब्बत है 'रसा' मेरी इबादत
ये मेरा दिल मेरा दस्त-ए-दुआ है
-रसा चुग़ताई
20. तेरी पहचान के लाखों अंदाज़
सर झुकाना ही इबादत तो नहीं
- परवीन फ़ना सय्यद
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