EPFO 3.0 : अगर आप नौकरी करते हैं, फूड डिलीवरी करते हैं, कैब चलाते हैं, फ्रीलांस काम करते हैं या असंगठित क्षेत्र में मजदूरी करते हैं, तो आने वाले समय में आपको भी पेंशन जैसी सामाजिक सुरक्षा योजना का फायदा मिल सकता है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) अपने अगले बड़े सुधार कार्यक्रम EPFO 3.0 पर काम कर रहा है।
इसका मकसद देश के करीब 60 करोड़ श्रमिकों को आधुनिक सोशल सिक्योरिटी सिस्टम से जोड़ना है। इसके तहत पहली बार गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को भी पेंशन और भविष्य निधि जैसी सुविधाओं के दायरे में लाने की तैयारी है। हालांकि, यह योजना अभी प्रस्तावित चरण में है और इसके अंतिम नियमों का ऐलान होना बाकी है। आइए समझते हैं कि EPFO 3.0 में क्या-क्या बड़े बदलाव हो सकते हैं।
क्या है EPFO 3.0?
पिछले एक साल में EPFO ने अपने EPFO 2.0 सुधारों के तहत क्लेम प्रक्रिया को आसान बनाया, नया पोर्टल शुरू किया और 123 क्षेत्रीय डाटाबेस को एक केंद्रीय डाटाबेस से जोड़ दिया। इससे ब्याज जमा होने और ऑनलाइन क्लेम जैसी सेवाएं तेज हुई हैं। अब अगला चरण EPFO 3.0 होगा, जिसमें पूरी तकनीकी व्यवस्था को कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) पर लाया जाएगा। इससे बैंक की तरह रियल टाइम में लेनदेन, योगदान और भुगतान संभव होगा। बड़ी संख्या में खातों का प्रबंधन भी आसान होगा।
हर कर्मचारी के लिए पेंशन की तैयारी
EPFO 3.0 का सबसे बड़ा बदलाव यूनिवर्सल पेंशन मॉडल हो सकता है। अभी EPF सदस्य रिटायरमेंट के समय अपनी जमा राशि निकाल सकते हैं, लेकिन नए मॉडल में उन्हें दो विकल्प मिल सकते हैं। पहला, जमा राशि के आधार पर नियमित मासिक पेंशन। दूसरा, जरूरत के हिसाब से हर महीने एक तय रकम निकालने की सुविधा, जिसे सिस्टेमैटिक विदड्रॉल प्लान कहा जाता है। यानी रिटायरमेंट के बाद सदस्य अपनी जरूरत के मुताबिक नियमित आय का तरीका चुन सकेंगे।
कई स्रोतों से होगा योगदान
नई व्यवस्था में सिर्फ कर्मचारी और नियोक्ता ही योगदान नहीं देंगे। प्रस्ताव के मुताबिक कम आय वाले लोगों के लिए सरकार, गिग वर्कर्स के मामले में एग्रीगेटर कंपनियां, सीएसआर फंड और अन्य दानदाता भी योगदान कर सकेंगे। इससे उन लोगों को भी रिटायरमेंट सुरक्षा मिल सकेगी, जिनकी आय नियमित नहीं होती।
गिग वर्कर्स को सोशल सिक्योरिटी कवर
देश में लाखों लोग फूड डिलीवरी, कैब सेवा, ई-कॉमर्स डिलीवरी और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए काम करते हैं। अभी इनमें से ज्यादातर लोगों के पास पीएफ या पेंशन जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। EPFO 3.0 के तहत इन्हें पहली बार सोशल सिक्योरिटी के दायरे में लाने की तैयारी है। अनुमान है कि अगले पांच वर्षों में करीब 2.5 करोड़ गिग और निर्माण क्षेत्र के श्रमिक इस व्यवस्था से जुड़ सकते हैं।
एक UAN से जुड़ेंगे कई नियोक्ता
गिग वर्कर्स अक्सर एक साथ कई कंपनियों या प्लेटफॉर्म के लिए काम करते हैं। इसे ध्यान में रखते हुए EPFO एक ऐसी व्यवस्था तैयार कर रहा है, जिसमें एक यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) के साथ कई नियोक्ताओं का योगदान दर्ज हो सकेगा। इससे कर्मचारी को अलग-अलग कंपनियों के पीएफ और पेंशन योगदान का पूरा रिकॉर्ड एक ही खाते में दिखाई देगा।
EPFO 3.0 में गिग वर्कर्स को मिलेगी पेंशन
रिटायरमेंट से पहले ही पता चल जाएगी पेंशन
EPFO 3.0 में हर सदस्य को एक डिजिटल डैशबोर्ड मिलने की भी योजना है। इसमें यह जानकारी मिलेगी कि अब तक कितना योगदान जमा हुआ है, रिटायरमेंट तक अनुमानित फंड कितना होगा और लक्ष्य पूरा करने के लिए कितना अतिरिक्त योगदान करना होगा। सदस्य अपनी जरूरत के हिसाब से रिटायरमेंट लक्ष्य बदल सकेंगे और सिस्टम उसी के अनुसार नई गणना दिखाएगा।
महंगाई को ध्यान में रखकर होगी गणना
नई व्यवस्था की एक खास बात यह भी होगी कि भविष्य की पेंशन का अनुमान महंगाई को ध्यान में रखकर लगाया जाएगा। सदस्य अलग-अलग परिस्थितियों में यह देख सकेंगे कि अगर वे ज्यादा या कम योगदान करें या रिटायरमेंट की उम्र बदलें, तो उनकी संभावित मासिक पेंशन कितनी होगी। इससे बेहतर वित्तीय योजना बनाने में मदद मिलेगी।
क्यों जरूरी हैं ये सुधार?
भारत की बड़ी आबादी असंगठित क्षेत्र में काम करती है, जहां नियमित पेंशन और सामाजिक सुरक्षा की सुविधा नहीं है। गिग इकॉनमी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन इस क्षेत्र के श्रमिकों के लिए रिटायरमेंट सुरक्षा लगभग नहीं के बराबर है। EPFO 3.0 का उद्देश्य इसी अंतर को खत्म करना है। अगर यह योजना लागू होती है, तो पहली बार संगठित और असंगठित क्षेत्र के बीच सोशल सिक्योरिटी का अंतर काफी हद तक कम हो सकता है।
क्या अभी लागू हो गई है यह योजना?
नहीं। EPFO 3.0 अभी प्रस्तावित सुधारों का हिस्सा है। कर्मचारी भविष्य निधि संगठन इसकी तकनीकी और नीतिगत रूपरेखा तैयार कर रहा है। अंतिम नियम, योगदान की दरें, पात्रता और लागू होने की तारीख का आधिकारिक ऐलान अभी नहीं हुआ है। इसलिए फिलहाल मौजूदा ईपीएफ और ईपीएस व्यवस्था पहले की तरह ही जारी रहेगी।
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