मानसून आते ही कई घरों में सुबह का एक डायलॉग लगभग तय हो जाता है,= "मम्मा, आज स्कूल नहीं जाना... बाहर बारिश हो रही है।" कभी ठंडी हवा, कभी रजाई का आराम, तो कभी भीगने का डर... बच्चों के पास स्कूल न जाने की वजहें भी तैयार रहती हैं। ऐसे में कई माता-पिता या तो डांटने लगते हैं या जल्दी-जल्दी तैयार कराने की कोशिश करते हैं।
टाइम्स नाऊ नवभारत पर यह भी पढ़ें - यूरोप में बच्चों को कैसे पालते हैं, भारतीय महिला ने बताए उनके 5 खास पैरेंटिंग रूल्स
लेकिन क्या आपने सोचा है कि शायद बच्चे को सिर्फ छुट्टी नहीं चाहिए, बल्कि थोड़ी-सी समझ, एक्साइटमेंट और मजेदार शुरुआत चाहिए। अगर सुबह की शुरुआत सकारात्मक हो, तो वही बच्चा मुस्कुराते हुए रेनकोट पहनकर स्कूल जाने के लिए तैयार हो सकता है। देखें ऐसे आसान और अपनाने लायक तरीके, जिनसे बारिश के दिनों में भी बच्चों का स्कूल जाने का मन बनने लगे।
बच्चे की बात पहले सुनिए, तुरंत मना मत कीजिए
जब बच्चा कहे कि आज स्कूल नहीं जाना, तो सबसे पहले यह जानने की कोशिश करें कि वजह क्या है। क्या उसे भीगने का डर है? तबियत खराब है? या सिर्फ आलस आ रहा है? जब बच्चे को लगेगा कि उसकी बात सुनी जा रही है, तो वह आपकी बात भी आसानी से मानेगा।
रात में ही सारी तैयारी कर लें
सुबह की भागदौड़ बच्चों को भी तनाव देती है। इसलिए रात में ही यूनिफॉर्म, जूते, बैग, रेनकोट और पानी की बोतल तैयार रख दें। सुबह जितनी कम हड़बड़ी होगी, बच्चा उतना ही आराम से तैयार होगा।

Bachcho ko school kaise bheje
सुबह का छोटा-सा सरप्राइज रखें
कभी पसंदीदा नाश्ता, कभी टिफिन में कोई खास चीज या रास्ते में पसंदीदा गाना। ऐसी छोटी-छोटी बातें बच्चों के लिए बड़ी खुशी बन जाती हैं। हर दिन बड़ा इनाम जरूरी नहीं होता, छोटी खुशी भी काफी होती है।
स्कूल की अच्छी बातें याद दिलाइए
आज दोस्तों से मिलोगे, आज ड्राइंग पीरियड है, मैडम नई कहानी सुनाएंगी.. स्कूल को सिर्फ पढ़ाई नहीं, बल्कि दोस्ती, खेल और नई चीजें सीखने की जगह बनाकर पेश करें।

How to motivate kids to go school
माता-पिता का मूड भी असर डालता है
अगर सुबह घर का माहौल तनाव भरा होगा, तो बच्चा भी चिड़चिड़ा महसूस करेगा। लेकिन अगर आप मुस्कुराते हुए उसे तैयार करेंगे, तो उसका मूड भी हल्का रहेगा। बच्चे अक्सर शब्दों से ज्यादा माता-पिता का व्यवहार सीखते हैं।
हर दिन छुट्टी की आदत न बनने दें
अगर सिर्फ हल्की बारिश के कारण बार-बार छुट्टी दी जाने लगे, तो बच्चा इसे आसान विकल्प मान सकता है। मौसम सुरक्षित हो और स्कूल खुला हो, तो नियमित दिनचर्या बनाए रखना बेहतर रहता है।
हर सुबह स्कूल भेजना सिर्फ यूनिफॉर्म पहनाने का काम नहीं है। यह बच्चे में जिम्मेदारी, कॉन्फिडेंस और अनुशासन की छोटी-छोटी नींव रखने जैसा है। बारिश के कुछ दिन गुजर जाएंगे, लेकिन इन दिनों में आपका धैर्य और सकारात्मक रवैया बच्चे के साथ लंबे समय तक रहेगा। इसलिए अगली बार जब वह कहे, "मम्मा, आज स्कूल नहीं जाना...", तो गुस्से की जगह मुस्कान के साथ उसका हाथ पकड़िए। कई बार एक प्यार भरी बात, सौ बार की डांट से ज्यादा असर करती है।
