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शतरंज के खेल में वजीर की जगह कैसे आई रानी, बड़ी दिलचस्प है कहानी

शतरंज की बिसात पर रानी का सबसे ताकतवर मोहरा बनना हमें ये समझाने के लिए काफी है कि कैसे समाज, संस्कृति और इतिहास मिलकर एक खेल के नियम तक बदल सकते हैं।

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शतरंज में पहले राजा के बराबर में मंत्री हुआ करता था, फिर कहां से आई रानी?

शतरंज जिसे अंग्रेजी में चेस कहते हैं, काफी मशहूर हो चुका है। शतरंज की बिसात में सबसे ताकतवर मोहरा होती है रानी। वह सीधी, तिरछी और जितने भी खाने चाहे, उतने आगे बढ़ सकती है। कई बार पूरी बाजी का नतीजा इसी एक मोहरे पर टिका होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शतरंज में हमेशा से रानी नहीं थी? एक समय ऐसा भी था जब इस जगह पर "वजीर" हुआ करता था। शतरंज के वजीर की रानी बनने की कहानी बहुत दिलचस्प है।

भारत का चतुरंग कैसे बना शतरंज

शतरंज का खेल भारत की ही देन है। यहां इसका जन्म लगभग 1500 साल पहले हुआ था। उस समय इसे चतुरंग कहा जाता था। चतुरंग में सेना के चार अंगों- पैदल सैनिक, घुड़सवार, हाथी और रथ को खेल के रूप में दर्शाया गया था। राजा के साथ एक और महत्वपूर्ण मोहरा होता था, जिसे मंत्री या सलाहकार माना जाता था। यही मोहरा आगे चलकर वजीर बना।

भारत से निकल चतुरंग का ये खेल फारस पहुंचा। वहां इसका नाम शतरंज पड़ गया। यहां मंत्री के लिए फर्ज या वजीर शब्द का इस्तेमाल होता था। शतरंज का मंत्री भी वजीर हो गया। हालांकि फारस के वजीर के पास रानी जैसी शक्ति नहीं थी। वह बस एक घर तिरछा चल सकता था। उसकी भूमिका राजा के सहायक भर की थी। इसलिए शतरंज का खेल भी थोड़ा धीमा हुआ करता था।

जब ईरान से यूरोप पहुंची शतरंज

आठवीं और नौवीं शताब्दी में अरबों के साथ शतरंज यूरोप पहुंचा। यहां खेल तो पसंद किया गया, लेकिन वजीर की अवधारणा लोगों के लिए कुछ अपरिचित थी। यूरोपीय समाज राजतंत्र और रानियों की सत्ता से परिचित था। इसलिए धीरे-धीरे वजीर की जगह एक स्त्री पात्र ने लेनी शुरू कर दी।

वजीर की जगह खेल में रानी ने ले ली। उसकी ताकत भी बदल गई। वह किसी भी दिशा में कितने भी खाने चल सकती थी। इससे खेल अचानक तेज, रोमांचक और रणनीतिक हो गया।

इतिहासकारों का मानना है कि उस समय यूरोप में कई प्रभावशाली रानियां सत्ता के केंद्र में थीं। खासकर स्पेन की महारानी इसाबेल I (Isabella I of Castile) का नाम इस बदलाव से जोड़कर देखा जाता है।

एक मोहरे ने बदल दिया पूरा खेल

रानी के ताकतवर बनने के बाद शतरंज पूरी तरह बदल गया। खेल पहले की तुलना में कहीं ज्यादा आक्रामक और तेज हो गया। नईृ-नई चालें विकसित हुईं। खेलने वालों को अधिक रणनीतियां बनाने का मिलने लगा। कुल मिलाकर ये खेल और भी मजेदार और मशहूर हो गया।

तो इस तरह से भारतीय चतुरंग के साधारण मंत्री से शुरू हुआ यह खेल आज दुनिया के शक्तिशाली रानी के इर्द-गिर्द खेला जाता है। शतरंज की बिसात पर रानी का सबसे ताकतवर मोहरा बनना हमें ये समझाने के लिए काफी है कि कैसे समाज, संस्कृति और इतिहास मिलकर एक खेल के नियम तक बदल सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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