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मरने का डर था फिर भी सिंगर गाता रहा कोर्रिडो, आखिर क्या होता है Corrido जिसके अंत में तय है मौत

1931 के बाद तो हर कोर्रिडो में किसी अपराधी की कहानी सुनाई जाने लगी जिसके आखिर में उसकी मौत के साथ संदेश दिया जाता कि इस रास्ते पर जो भी गया उन सबका अंजाम एक जैसा ही रहा।

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क्या है ये मेक्सिकन कोर्रिडो?
Authored by: Suneet Singh
Updated Jun 17, 2026, 16:13 IST
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Mexican Corrido: दुनिया के हर समाज के पास अपनी खास कहानियां होती हैं। कुछ कहानियां किताबों में लिखी जाती हैं, कुछ स्मारकों पर उकेरी जाती हैं तो कुछ पीढ़ी-दर-पीढ़ी लोगों की जुबान पर जिंदा रहती हैं। मेक्सिको में ऐसी ही कहानियों को जिंदा रखने का एक अनोखा माध्यम है कोर्रिडो (Corrido)। कोर्रिडो वहां की ऐसी संगीत शैली है जिसमें किसी योद्धा, किसी क्रांतिकारी, किसी प्रेमी जोड़े से होते हुए किसी स्मगलर, किसी ड्रग लॉर्ड या फिर किसी भी कुख्यात अपराधी की कहानी को गीतों में पिरोकर दुनिया के सामने रखा जाता है। दिलचस्प बात ये है कि हर कोर्रिडो के अंत में उसके नायक या खलनायक की मौत सुनिश्चित होती है।

स्पेन से मेक्सिको पहुंचा था कोर्रिडो

20वीं सदी के अंत तक मेक्सिको की पहचान बन चुके कोर्रिडो की शुरुआत वैसे स्पेन से मानी जाती है। ये उस दौर की बात है जब अखबार, रेडियो या टीवी नहीं हुआ करते। ऐसे में कुछ लोगों की टोली घूम-घूम कर लोगों को युद्ध या किसी बड़ी घचना की खबरें सुनाया करती थी। धीरे-धीरे खबरें सुनाने का काम संगीत के साथ किया जाने लगा। देखते देखते इस काम ने संगीत शैली का रूप ले लिया। इस शैली को स्पेन में रोमान्सेरो कहा गया। 15वीं और 16वीं सदी में ये रोमान्सेरो खूब लोकप्रिय रहा।

17वीं सदी में रोमान्सेरो स्पेनिश उपनिवेशवादियों के साथ मेक्सिको पहुंची। लेकिन मेक्सिको पहुंचकर यह संगीत वैसा नहीं रहा जैसा स्पेन में था। इसकी आत्मा तो वही रही लेकिन साल दर साल इसका विषय इतना बदल गया कि इसकी पहचान मेक्सिको से जुड़कर रह गई।

बदलते मेक्सिको के साथ बदलता गया कोर्रिडो

जब 20वीं सदी दस्तक दे रही थी तब मेक्सिको की सत्ता पर पोर्फिरियो दियास काबिज था। उस समय वहां यूरोपियन कल्चर को बहुत महत्व दिया जाता था। उधर आम लोगों की अपनी दुनिया थी और उनकी अपनी समस्याएं थीं। कोर्रिडो ने इन्हीं लोगों की आवाज बनकर काम किया।

1910 से 1920 के बीच मैक्सिकन क्रांति हुई। इसे कोर्रिडो का गोल्डेन एरा माना जाता है। इस दौरान हजारों गीत लिखे गए। इनमें क्रांतिकारियों, सैनिकों और नेताओं की कहानियां सुनाई गईं। एमिलियानो जापाता, पंचो विला और फ्रांसिस्को मादेरो जैसे बड़े नेताओं के बारे में गीत पूरे देश में गाए जाते थे। ये वो वक्त था जब लोग अखबारों से ज्यादा कोर्रिडो सुनकर घटनाओं को समझते थे।

क्रांति के बाद ये क्या हुआ कोर्रिडो के साथ

बात साल 1931 की है। मेक्सिको में एल पाब्लोते नाम का एक कोर्रिडो मार्केट में आया। इसमें ड्रग स्मगलर पाब्लो गोंजालेस की कहानी थी। कहानी के अंत में गोंजालेस की मौत हो जाती है। इस कहानी के जरिए कोर्रिडो ने संदेश दिया कि अपराध का रास्ता कभी ठीक नहीं होता। जिस तरह से पाब्लो गोंजालेस का अंत हुआ उसी तरह से हर बुरे काम का विनाश तय है।

इसके बाद तो एक के बाद एक ऐसे कोर्रिडो की बाढ़ आ गई। हर कोर्रिडो में किसी अपराधी की कहानी सुनाई जाने लगी जिसके आखिर में उसकी मौत के साथ संदेश दिया जाता कि इस रास्ते पर जो भी गया उन सबका अंजाम एक जैसा ही रहा।

जब कोर्रिडो सिंगर्स पर काबू करने लगे ड्रग लॉर्ड्स

जब कोर्रिडो सिंगर्स पर काबू करने लगे ड्रग लॉर्ड्स

समय के साथ यह बदलने लगा। बड़े-बड़े स्मगलर्स इसमें घुसने लगे। ड्रग माफिया और दूसरे बड़े अपराधियों ने कोर्रिडो को अपने आतंक के प्रचार का जरिया बना लिया। ये लोग कोर्रिडो सिंगर्स को हायर करते, उन्हें पैसे देते और बदले में अपना महिमामंडन करवाते। ऐसे कोर्रिडो विरोधियों को अपनी ताकत का एहसास कराने के लिए भी गवाए जाते थे।

यहीं से सरकार और कोर्रिडो के बीच टकराव शुरू हुआ। कई रेडियो स्टेशनों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में ऐसे गीतों पर रोक लगाई जाने लगी। लेकिन फिर भी मेक्सिको की बड़ी आबादी के बीच इसकी लोकप्रियता कम ना हुई।

कालीनो सांचेज ने बदल डाला सबकुछ

1980 के दशक में कालीनो सांचेज नाम के एक कोर्रिडो सिंगर खूब मशहूर हुए। आवाज और अंदाज ऐसा कि देखने वाले झूमने लगते। सांचेज को सुनने के लिए हजारों की संख्या में भीड़ जुटने लगी। सांचेज अपनी कच्ची लेकिन सच्ची आवाज के जादू से लोगों के दिलों पर राज करने लगे। मेक्सिकन माफियाओं के लिए सांचेज ने जो कोर्रिडो गाए उसने तो उन्हें वहां के लोगों के बीच सुपरस्टार बना दिया।

कालिनो सांचेज (Photo: Youtube)

कालिनो सांचेज (Photo: Youtube)

फिर आई तारीख 16 मई 1992. कालिनो सांचेज किसी खचाखच भरे क्लब में परफॉर्म कर रहे थे। उनके कॉर्रि़डो पर पूरा क्लब झूम रहा था। तभी स्टेज पर गा रहे सांचेज के पास नीचे से एक पर्ची पहुंची। पर्ची पर लिखा था- इस कॉर्रिडो को तुरंत बंद कर दो। ऐसा नहीं किया तो हम तुम्हें मार डालेंगे। सांचेज ने पर्ची पढ़ी। थोड़ा सा हड़बड़ाए। माथे से पसीना पोछा और फिर से गाने लगे। सांचेज उस धमकी की गंभीरता को जानते थे। बावजूद उन्हें लगा कि जिस कला ने उनको शोहरत की बुलंदियों पर बिठाया है उसका इस तरह से अपमान ठीक नहीं है। उन्होंने अपना कोर्रिडो पूरा किया। शो खत्म हुआ वो क्लब से निकल गए।

अगले दिन का अखबार जब लोगों के घर पहुंचा तो पहले पन्ने पर कालिनो सांचेज की फोटो छपी थी और नीचे लिखा था- कुछ अज्ञात लोगों ने मशहूर कोर्रिडो सिंगर कालिनो सांचेज की गोली मारकर हत्या कर दी। खबर के साथ उस आखिरी परफॉर्मेंस का वीडियो भी वायरल होने लगा। वीडियो में वो धमकी भरा नोट पढ़ते साफ देखे जा सकते हैं। आप भी देखें वो वीडियो:

कालिनो सांचेज की हत्या कोर्रिडो के ताबूत में आखिरी कील साबित हुई। सरकार ने सख्ती के साथ अपराधियों वाले कोर्रिडो बंद करवा दिये। समय के साथ ड्रग माफिया और स्मगलरों ने भी खुद को इन सबसे अलग कर लिया। मेक्सिको में आज भी कोर्रिडो तो है, लेकिन ना तो अब उतने सुनने वाले बचे हैं और ना ही सुनाने वाले।

बॉलीवुड, शाहरुख और कोर्रिडो

कोर्रिडो के जादू से बॉलीवुड भी अछूता नहीं रहा है। साल 1994 में कभी हां कभी ना नाम की फिल्म रिलीज हुई। फिल्म के लीड रोल में थे शाहरुख खान। इस फिल्म में एक कोर्रिडो उनपर भी फिल्माया गया था। किसी क्लब में वह एक माफिया की कहानी को गा कर सुनाते हैं। इस कहानी को देख उसी क्लब में मौजूद एक डॉन इतना खुश हुआ कि रोने लगा।

वह शाहरुख खान को गले लगा लेता है और कहता है कि कभी जान भी मांग लोगे तो दे देंगे। कोर्रिडो का जादू ही कुछ ऐसा था कि वो बड़े से बड़े अपराधी की आंखों से भी आंसू निकाल दे। आप भी शाहरुख खान की फिल्म का वो कोर्रिडो जरूर सुनिये:

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