Chhatrapati Shivaji Maharaj Jayanti 2026: आज छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती है। उनका जन्म 19 फरवरी 1630 को शिवनेरी किले में हुआ था। शिवाजी महाराज ने विपरीत परिस्थितियों में भी अदम्य साहस दिखाते हुए मराठा साम्राज्य की स्थापना की। वह वीर योद्धा होने के साथ ही कुशल प्रशासक और दूरदर्शी शासक भी थे। शिवाजी महाराज ने सिखाया कि स्वराज्य केवल सत्ता नहीं, जनता के अधिकार और आत्मसम्मान का प्रतीक भी है।
छत्रपति शिवाजी महाराज का जीवन साहस, संगठन और देशप्रेम की मिसाल है, जो आज भी युवाओं के लिए मार्गदर्शक बना हुआ है। आज शिवाजी महाराज जयंती पर पढ़ें छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रेरक विचार:
Chhatrapati Shivaji Maharaj Quotes in Hindi
1. स्वतंत्रता एक ऐसा वरदान है जिसे पाने का हर किसी को हक़ है।
2. एक छोटा कदम छोटे लक्ष्य पर, बाद में विशाल लक्ष्य भी हासिल करा देता है।
3. नारी के सभी अधिकारों में, सबसे महान अधिकार मां बनने का है।
4. हमें अपने दुश्मन को कभी कमजोर नहीं समझना चाहिए और अपने से अधिक ताकतवर समझकर भयभीत भी नहीं होना चाहिए।
5. जरूरी नहीं कि विपत्ति का सामना, दुश्मन के सम्मुख से ही करने मे, वीरता हो। वीरता तो विजय में है।
6. इस दुनिया में हर व्यक्ति को स्वतंत्र रहने का अधिकार है और वह अधिकार को पाने के लिए वह किसी से लड़ सकता है।
7. जब हौसले बुलन्द हो, तो पहाड़ भी एक मिट्टी का ढेर लगता है।
8. शत्रु को कमजोर न समझो, तो अत्यधिक बलिष्ठ समझ कर डरना भी नहीं चाहिए।
9. यह जरूरी नहीं कि खुद गलती करके ही सीखा जाए, दूसरों की गलती से भी बहुत कुछ सीखा जा सकता है।
10. जब लक्ष्य जीत की हो, तो हासिल करने के लिए कितना भी परिश्रम, कोई भी मूल्य क्यों न हो उसे चुकाना ही पड़ता है।
11. सर्वप्रथम राष्ट्र, फिर गुरु, फिर माता-पिता, फिर परमेश्वर। अतः पहले खुद को नही राष्ट्र को देखना चाहिए।
12. आप एक छोटे कदम से, छोटे से लक्ष्य की शुरुआत करके भी बड़े बड़े लक्ष्य को आसानी से पा सकते है।
13. अगर मनुष्य के पास आत्मबल है, तो वो समस्त संसार पर अपने हौसले से विजय पताका लहरा सकता है।
14. इस जीवन मे सिर्फ अच्छे दिन की आशा नही रखनी चाहिए, क्योकी दिन और रात की तरह अच्छे दिनो को भी बदलना पङता है।
15. जो मनुष्य समय के कुच्रक मे भी पूरी शिद्दत से, अपने कार्यो मे लगा रहता है।
16. मनुष्य को प्रतिशोध लेने की भावना अंदर ही अंदर जलाती रहती है लेकिन इस पर संयम से प्रतिशोध पर काबू पाया जा सकता है।
17. शत्रु चाहे कितना ही बलवान क्यो न हो, उसे अपने इरादों और उत्साह मात्र से भी परास्त किया जा सकता है।
18. जो व्यक्ति अपने आत्मबल को जान लेता है, खुद को पहचान लेता है, जो मानव जाति के कल्याण को सोच रखता है वही व्यक्ति पूरे विश्व पर राज्य कर सकता है।
19. आत्मबल, सामर्थ्य देता है, और सामर्थ्य, विद्या प्रदान करती है।
20. विद्या, स्थिरता प्रदान करती है, और स्थिरता, विजय की तरफ ले जाती है।
21. प्रतिशोध मनुष्य को जलाती रहती है, संयम ही प्रतिशोध को काबू करने का उपाय होता है।
22. एक पुरुषार्थी भी, एक तेजस्वी विद्वान के सामने झुकता है। क्योंकि पुरुषार्थ भी विद्या से ही आता है।
23. जीवन में सिर्फ अच्छे दिन हमेशा नहीं रह सकते, क्योंकि दिन और रात की तरह सुख-दुःख आते-जाते रहते हैं।
