सुबह की गरमा-गरम चाय की चुस्की हो या फिर कड़ाही में भुनती किसी जायकेदार सब्जी की ग्रेवी, अदरक के बिना भारतीय रसोई का जादू अधूरा सा लगता है। अदरक खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ही सेहत के लिए भी एक कुदरती खजाना है। हालांकि क्या आपने कभी सोचा है कि हमारे देश में वो कौन सी जगह है, जिसे आधिकारिक तौर पर 'जिंजर कैपिटल ऑफ इंडिया' कहा जाता है। जवाब है- मिजोरम। जी हां, नीति आयोग ने मिजोरम की बेहतरीन पैदावार और बेमिसाल स्वाद की वजह से इसे देश की 'अदरक राजधानी' का दर्जा दिया है।
मिजोरम के अदरक में ऐसा क्या खास
मिजोरम के हरे-भरे पहाड़, साफ हवा, भरपूर बारिश और वहां की अनूठी लाल-अम्लीय मिट्टी ने कुदरती तौर पर इस अदरक को एक खास किस्म का जादू बख्शा है। यहां उगने वाली अदरक, जिसे प्यार से 'मिजो जिंजर' कहा जाता है, देखने में काफी बड़े आकार की और हल्के पीले रंग की होती है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें रेशे बहुत ही कम होते हैं। जब आप इसे छीलते या पीसते हैं, तो यह बेहद आसानी से एकदम स्मूथ पेस्ट में बदल जाती है।
खुशबू और तीखापन
इसकी तेज खुशबू और स्वाद का तीखापन इसे बाकी जगहों की अदरक से पूरी तरह अलग बनाते हैं। फूड एक्सपर्ट्स मानते हैं कि मिजो अदरक में ओलेरोसिन और जिंजरोल नाम के कुदरती तत्वों की मात्रा दुनिया की आम अदरक के मुकाबले दोगुनी से भी ज्यादा होती है। यही वो खास तत्व हैं जो अदरक को उसका तीखा स्वाद, औषधीय गुण और बेमिसाल खुशबू देते हैं। इसी वजह से खाने-पीने की चीजों के अलावा दवाइयां बनाने वाली बड़ी-बड़ी कंपनियां भी मिजोरम की इस अदरक की सबसे ज्यादा मांग करती हैं।
अदरक की कई किस्म
मिजोरम में अदरक की कई स्थानीय किस्में उगाई जाती हैं, जिनमें 'थिंगपुई' और 'थिंगलाइडम' सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। यहां के किसान सदियों पुरानी पारंपरिक तकनीकों से इसकी खेती करते हैं, जिससे इसकी प्राकृतिक मिठास और गुण हमेशा बरकरार रहते हैं।
साल 2021 में मिजो अदरक की इस अनोखी पहचान को देखते हुए इसे प्रतिष्ठित जीआई (GI) टैग दिया गया था। जीआई टैग मिलने का मतलब यह है कि दुनिया में कहीं भी मिजो अदरक के नाम पर कोई नकली उत्पाद नहीं बेचा जा सकता।
आज मिजोरम का यह छोटा सा मसाला न केवल देश के अलग-अलग कोनों में रसोई का स्वाद बढ़ा रहा है, बल्कि विदेशों में भी खूब निर्यात किया जा रहा है। इस वजह से वहां के स्थानीय पहाड़ी किसानों की आजीविका को एक बड़ा सहारा मिला है।
