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Shayari of the day: रिश्तों की सच्चाई और स्वाभिमान को खूबसूरती से बयां करता हैं अहया भोजपुरी का यह शेर

Shayari of the Day (20 फरवरी की शायरी), आज की शायरी: यह शेर हमें सिखाता है कि रिश्तों में सच्चाई सबसे महत्वपूर्ण है। जहां दिल न मिले, वहां केवल हाथ मिलाना एक औपचारिकता भर है और सच्चा इंसान औपचारिक रिश्तों से दूर ही रहना पसंद करता है।

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आज 20 फरवरी की शायरी

Shayari of the Day in Hindi (आज की शायरी): शायरी हमेशा से अपने दिल में छिपे जज्बातों को बयां करने का सबसे आसान और असरदार तरीका रहा है। शेरों के जरिए बड़ी से बड़ी बातें हल्के अंदाज में और हल्की से हल्की बातों को भी गंभीर तरीके से कहा जा सकता है। इंसानों के लगभग हर मसलों पर शेर लिखे गए हैं। आज की शायरी में पढ़ते हैं आहया भोजपुरी का एक मशहूर शेर और समझते हैं कि इस शेर के मायने क्या हैं।

"आता नहीं अदू से यारी मुझे निभाना, मिलता नहीं वो दिल से फिर हाथ क्या मिलाना"

यह शेर रिश्तों की सच्चाई और आत्मसम्मान की भावना को बहुत खूबसूरती से बयान करता है। यहां अदू का अर्थ है दुश्मन या विरोधी। शायर कहता है कि उसे दुश्मन से दोस्ती निभानी नहीं आती। यानी वह बनावटी मेल-मिलाप या दिखावटी रिश्तों में विश्वास नहीं रखता। अगर सामने वाला व्यक्ति मन से साफ नहीं है, भीतर से सच्चा नहीं है, तो केवल औपचारिक हाथ मिलाने का कोई अर्थ नहीं रह जाता।

दूसरे मिसरे में शायर का कहना है कि जब सामने वाला दिल से जुड़ने को तैयार ही नहीं, तो केवल हाथ मिलाने जैसी रस्म अदायगी का क्या फायदा? मतलब कि रिश्ते केवल बाहरी व्यवहार से नहीं, भीतर की नीयत से बनते हैं। यदि मन में कटुता, स्वार्थ या छल छिपा हो, तो ऊपर-ऊपर की दोस्ती खोखली होती है।

अहया भोजपुरी का यह शेर आत्मसम्मान का संदेश भी देता है। कई बार लोग सामाजिक दबाव या परिस्थितियों के कारण ऐसे लोगों से भी मेलजोल रखते हैं जिनके इरादे साफ नहीं होते। शायर इस दिखावे से इनकार करता है। वह साफ कहता है कि उसे दुश्मन से दोस्ती निभाना नहीं आता, क्योंकि उसकी फितरत सच्ची है।

कुल मिलाकर यह शेर हमें सिखाता है कि रिश्तों में सच्चाई सबसे महत्वपूर्ण है। जहां दिल न मिले, वहां केवल हाथ मिलाना एक औपचारिकता भर है और सच्चा इंसान औपचारिक रिश्तों से दूर ही रहना पसंद करता है।

अहया भोजपुरी के मशहूर शेर

1. मिरा घर जलाने वाले मुझे फ़िक्र है तिरी भी

कि हवा का रुख़ जो बदला तिरा घर भी जल न जाए

2. यूं तो लड़ाई-झगड़े की आदत नहीं मुझे

फिर भी ग़लत किया था गरेबान छोड़ कर

3. मिला है तख़्त जो जम्हूरियत में बंदर को

तो उन से क्या सभी जंगल के शेर डर जाएँ

4. सब हिफ़ाज़त कर रहें हैं मुस्तक़िल दीवार की

जब कि हमला हो रहा है मुस्तक़िल बुनियाद पर

5. ख़ुद पर किसी को हँसने का मौक़ा नहीं दिया

पूछा किसी ने हाल तो सिगरेट जला लिया

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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